EPFO ने सितंबर 2026 के लिए Electronic Challan-cum-Return (ECR) फाइल करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर **31 अक्टूबर** कर दिया है। यह फैसला वेज सीलिंग को **₹15,000** से बढ़ाकर **₹25,000** किए जाने के बाद लिया गया है, ताकि कंपनियों को अपने पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन (PF Contribution) को फिर से कैलकुलेट करने का पर्याप्त समय मिल सके।
कंपनियों के लिए क्या बदला?
सरकारी नियमों के अनुसार, प्रोविडेंट फंड (PF) का कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर कर्मचारी के वेतन का 12% होता है। पुरानी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिस पर अधिकतम योगदान ₹1,800 बनता था। अब सीलिंग ₹25,000 होने से यह लायबिलिटी बढ़कर ₹3,000 हो गई है। इसका मतलब है कि उन कर्मचारियों के लिए भी कंपनियों को अब ज्यादा योगदान देना होगा जो पहले इस दायरे से बाहर थे।
मार्जिन पर असर
यह बदलाव खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, टेक्सटाइल्स और हॉस्पिटैलिटी जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर की कंपनियों पर असर डालेगा। अगर कंपनी के पास बड़ी संख्या में कर्मचारी इस सैलरी ब्रैकेट में आते हैं, तो उनके ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर तिमाही नतीजों में मार्जिन पर दिखाई देगा।
अनुपालन (Compliance) पर ध्यान
कंपनियों को अब अपने इंटरनल पेरोल सॉफ्टवेयर को तुरंत अपडेट करना होगा। साथ ही, EPFO पोर्टल पर उन नए कर्मचारियों को रजिस्टर करना जरूरी है जो वेज सीलिंग के दायरे में आ गए हैं। किसी भी डेटा मिसमैच से बचने के लिए कंपनियों को जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी, ताकि बाद में पेनल्टी या लेबर अथॉरिटी की सख्ती से बचा जा सके।
निवेशकों के लिए अगली कुछ तिमाहियों के 'कॉन्फ्रेंस कॉल्स' में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इस बढ़ी हुई लेबर कॉस्ट को कैसे मैनेज कर रही हैं और इसका असर उनकी ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पर कितना पड़ रहा है।
