EPF Wage Ceiling: अब **₹25,000** तक बढ़ेगी वेज सीलिंग, कॉर्पोरेट मार्जिन पर पड़ेगा दबाव

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
EPF Wage Ceiling: अब **₹25,000** तक बढ़ेगी वेज सीलिंग, कॉर्पोरेट मार्जिन पर पड़ेगा दबाव

सरकार ने EPF की वेज सीलिंग को **₹15,000** से बढ़ाकर **₹25,000** कर दिया है। **17 सितंबर, 2026** से लागू हुए इस नियम का सीधा असर कंपनियों के ऑपरेटिंग खर्चों पर पड़ेगा और **51 लाख** से ज्यादा कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे।

क्या है नया बदलाव?

Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने 2014 के बाद पहली बार वेज सीलिंग में बड़ा बदलाव किया है। अब ₹25,000 तक की सैलरी पर अनिवार्य पीएफ कंट्रीब्यूशन देना होगा। यह कदम 2020 के लेबर कोड के अनुरूप उठाया गया है।

'50 परसेंट नियम' का खेल

नए रेगुलेशन के तहत, अगर किसी कर्मचारी का अलाउंस उनकी कुल सैलरी के 50% से ज्यादा है, तो अतिरिक्त हिस्से को भी 'वेजेस' (Wages) माना जाएगा। इसका मतलब है कि अब कंपनियों के लिए पीएफ कटौती के लिए सैलरी का दायरा बढ़ गया है। अनिवार्य 12% पीएफ डिडक्शन अब बड़े वेतन आधार पर कैलकुलेट होगा, जिससे कंपनियां और कर्मचारी दोनों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

कंपनियों के लिए बढ़ेगी चुनौती

इस नियम के कारण कंपनियों की मंथली वैधानिक देनदारियां (Statutory liabilities) बढ़ गई हैं। अब एम्प्लॉयर का अधिकतम पेंशन कंट्रीब्यूशन शेयर ₹1,250 से बढ़कर करीब ₹2,083 प्रति महीना हो गया है। विशेष रूप से रिटेल, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर जैसी लेबर-इंटेंसिव कंपनियों के लिए यह सीधा उनके क्वार्टरली वेज बिल पर असर डालेगा। EPFO अपने ECR सिस्टम के जरिए इसकी सख्ती से निगरानी कर रहा है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आए इस बदलाव से कॉर्पोरेट मार्जिन्स पर दबाव आने की आशंका है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों के रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह साफ नहीं है कि कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च को खुद झेलेंगी या ग्राहकों पर कीमतों के जरिए शिफ्ट करेंगी। लेबर नियमों की सख्ती के कारण अब कंपनियों के पास सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करने की गुंजाइश भी काफी कम रह गई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.