Enforcement Directorate (ED) ने देशभर के 100 हाईवे टोल प्लाजा पर एक बड़े टोल कलेक्शन घोटाले का खुलासा किया है। आरोपी फर्जी मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर कैश की हेराफेरी कर रहे थे और NHAI की आधिकारिक निगरानी प्रणाली को चकमा दे रहे थे।
रेड और रिकवरी का ब्यौरा
Enforcement Directorate (ED) ने देशभर में फैले टोल कलेक्शन घोटाले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 2 और 3 सितंबर, 2026 को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस ऑपरेशन के दौरान जांच एजेंसियों ने ₹1.03 करोड़ की बेहिसाब नकदी बरामद की है और घोटाले से जुड़ी 8 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
कैसे काम कर रहा था यह रैकेट?
जांच में सामने आया है कि 'Mobdata' और 'Any' नाम के दो अवैध मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल गैर-FASTag वाले वाहनों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। इन ऐप्स के जरिए फर्जी रसीदें बनाकर सरकार को मिलने वाले राजस्व (Revenue) को सीधे अपनी जेब में भरा जा रहा था। यह सारा खेल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की आधिकारिक अकाउंटिंग प्रणाली से बचकर किया जा रहा था।
जांच का दायरा और निवेशकों के लिए मायने
यह पूरा मामला जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिला पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बदल गया। अब ED इस बात की जांच कर रही है कि इस घोटाले में कौन-कौन से बिचौलिए और एजेंसियां शामिल थीं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह एक चेतावनी है। भविष्य में टोल कलेक्शन सिस्टम में डिजिटल सुरक्षा और ऑडिटिंग के सख्त नियम लागू हो सकते हैं, जिससे कंपनियों के कंप्लायंस खर्च (Compliance Cost) बढ़ सकते हैं।
