वोटर लिस्ट को अपडेट करने वाली अहम प्रक्रिया 'स्पेशल समरी रिवीजन' में देरी को लेकर Election Commission of India मुश्किलों में है। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि इस सुस्ती से आने वाले स्टेट इलेक्शन में नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन पर बुरा असर पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
Election Commission of India (ECI) हर साल मई में 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) चलाता है, ताकि 18 साल पूरे कर चुके नए वोटर्स का नाम लिस्ट में जुड़ सके। लेकिन 2024 के बाद से इस सालाना प्रक्रिया में देरी देखी जा रही है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
आंतरिक मतभेद और कानूनी राय
सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग के अंदर भी इस प्रक्रिया को शुरू करने को लेकर मंथन चल रहा है। आयोग इस बात पर कानूनी राय ले रहा है कि क्या मौजूदा 'इंटेंसिव रिवीज़न' (जैसे बिहार में चल रहा है) के बीच इस सालाना प्रक्रिया की जरूरत है।
विपक्षी पार्टियों का हमला
Congress समेत कई विपक्षी दलों ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं का तर्क है कि अगर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में देरी हुई, तो उत्तर प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव में युवा वोटर्स अपने मताधिकार से वंचित रह सकते हैं। आयोग की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
अभी तक आयोग ने 2026-27 के रिवीज़न साइकिल के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप जारी नहीं किया है, जिससे आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच असमंजस का माहौल बना हुआ है। अब निवेशकों और देशवासियों की नजरें आयोग के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं कि वे इस प्रशासनिक प्रक्रिया को कब पटरी पर लाएंगे।
