त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ते वर्कफोर्स टर्नओवर को रोकने के लिए ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने कमर कस ली है। स्टाफ टिके रहें, इसके लिए कंपनियों ने अपने इंसेंटिव बजट में **15-20%** का इजाफा किया है।
भारत में ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियां इस फेस्टिव सीजन में अपने काम के तरीके को बदल रही हैं। वेयरहाउसिंग और डिलीवरी सेक्टर में स्टाफ छोड़ने की दर यानी 'टर्नओवर रेट' 35-40% तक पहुंच जाता है, जिसे देखते हुए कंपनियां अब भारी भर्ती के बजाय पुराने कर्मचारियों को बनाए रखने पर जोर दे रही हैं।\n\n### इंसेंटिव का नया गणित\nकंपनियों ने इस बार फेस्टिव इंसेंटिव बजट को पिछले वर्षों के मुकाबले 15-20% तक बढ़ा दिया है। अब पुराने तरीके यानी फ्लैट बोनस के बजाय 'माइलस्टोन-बेस्ड' रिवॉर्ड्स पर फोकस है। इसका मतलब है कि जो कर्मचारी हफ्ते भर अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे और सीजन के अंत तक टिके रहेंगे, उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\nनिवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर का खर्च अब बदल रहा है। टियर-2 शहरों में वेयरहाउस स्टाफ को बेस सैलरी से 18-22% ज्यादा प्रीमियम मिल रहा है, जबकि मेट्रो शहरों में यह बढ़ोतरी 12-15% है। कुछ कंपनियों ने तो अपनी ऑवरली रेट भी ₹110 से बढ़ाकर ₹150 कर दी है।\n\nFlipkart और Myntra जैसी प्रमुख कंपनियों ने मल्टी-लेयर इंसेंटिव स्ट्रक्चर लागू किया है, जिसमें गिफ्ट वाउचर और रेफरल बोनस भी शामिल हैं। हालांकि, तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन का कहना है कि इन इंसेंटिव्स को पाने के लिए कर्मचारियों को 12 से 14 घंटे की कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। आने वाली तिमाहियों में इन बढ़ते लेबर खर्चों का सीधा असर कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दिखेगा। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या यह रणनीति डिलीवरी एफिशिएंसी बढ़ा पाएगी या मुनाफा घटेगा।
