गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में आई तेजी ने सरकारी कोशिशों पर पानी फेर दिया। वहीं, Walmart के शेयर **9%** से ज्यादा टूट गए, क्योंकि कंपनी ने पिछले 6 सालों में सबसे धीमी बिक्री ग्रोथ दर्ज की है, जो कंज्यूमर खर्च में संभावित नरमी का संकेत है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई और यह **$4,530** प्रति औंस के करीब पहुंच गया।
बॉन्ड यील्ड के दबाव में डाउ जोन्स
गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) में 703.84 अंकों यानी 1.32% की बड़ी गिरावट आई और यह 52,759.21 पर बंद हुआ। बाजार की इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड (US Treasury bond yields) में आई तेज उछाल है।
हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury Department) ने बॉन्ड बायबैक (bond buybacks) बढ़ाकर कर्ज बाजार को स्थिर करने की कोशिश की थी, लेकिन यह कोशिश नाकाम रही और यील्ड में फिर से बढ़ोतरी होने लगी। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक शेयरों के मुकाबले बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं, क्योंकि उनमें जोखिम कम होता है और रिटर्न बेहतर मिलता है।
Walmart के नतीजों से रिटेल सेक्टर में हलचल
बाजार की गिरावट में Walmart के शेयरों की बड़ी बिकवाली ने और तेजी ला दी। कंपनी के शेयर करीब 9.15% गिर गए। यह गिरावट कंपनी की दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद आई, जिसने निवेशकों को निराश किया। Walmart ने बताया कि अमेरिका में उसकी कंपेरेबल सेल्स ग्रोथ (comparable sales growth) (ईंधन को छोड़कर) सिर्फ 2.6% रही। यह पिछले 6 सालों में सबसे धीमी ग्रोथ है।
निवेशक अक्सर Walmart को अमेरिकी कंज्यूमर की आर्थिक सेहत का बैरोमीटर मानते हैं। यहां बिक्री में नरमी यह बताती है कि बड़े रिटेलर्स भी कंज्यूमर के खर्च में सावधानी के चलते बिक्री बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे रिटेल सेक्टर और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जो काफी हद तक घरेलू खपत पर निर्भर है।
बाजार की अनिश्चितता में सोने में तेजी
जहां इक्विटी मार्केट दबाव में था, वहीं सोने की कीमतों में लगातार तेजी जारी रही और यह लगभग $4,530 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। यह लगातार तीसरा हफ्ता है जब सोने की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। सोने को अक्सर एक सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) माना जाता है, खासकर तब जब अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता हो या सरकारी कर्ज को लेकर चिंताएं बढ़ रही हों। डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी फिस्कल सस्टेनेबिलिटी (fiscal sustainability) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सोने की कीमतों में यह उछाल देखा जा रहा है। निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि सरकारी कर्ज प्रबंधन में मुद्रास्फीति (inflation) का दबाव बढ़े बिना स्थिरता कैसे लाई जा सकती है।
आगे चलकर, बाजार की नजर बॉन्ड यील्ड की चाल और कंज्यूमर खर्च से जुड़े आंकड़ों पर रहेगी। अगर यील्ड में अस्थिरता बनी रहती है और रिटेल कंपनियां बिक्री में नरमी की रिपोर्ट देना जारी रखती हैं, तो बाजार सहभागियों के बीच और अधिक सतर्कता देखी जा सकती है।
