Nifty 50: FIIs की बिकवाली के बीच DIIs बने ढाल, बाजार ने दिखाई मजबूती

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Nifty 50: FIIs की बिकवाली के बीच DIIs बने ढाल, बाजार ने दिखाई मजबूती

10 सितंबर 2026 को बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने **₹438.24 करोड़** के शेयर बेचे, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) ने **₹1,025.85 करोड़** की खरीदारी कर बाजार को संभाल लिया। नतीजतन, Nifty 50 **0.2%** बढ़कर **23,477.80** पर बंद हुआ। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क रखा है।

भारतीय शेयर बाजार ने 10 सितंबर 2026 को शानदार लचीलापन दिखाया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, जहां विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने एक मजबूत सहारा प्रदान किया। इस संतुलन के कारण Nifty 50 0.2% की रिकवरी के साथ 23,477.80 के स्तर पर बंद होने में सफल रहा।

कच्चे तेल की आग और ग्लोबल रिस्क

बाजार की बढ़त के बावजूद, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने चिंताओं को बरकरार रखा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें $102 से $107 प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि तेल महंगा होने से आयात लागत बढ़ती है, जिसका सीधा असर महंगाई और रुपये की चाल पर पड़ता है। जो कंपनियां ईंधन या आयातित कच्चे माल पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे निवेशक अभी जोखिम लेने से बच रहे हैं।

सेक्टोरल परफॉर्मेंस और बाजार का मूड

दिन भर का कारोबार मिला-जुला रहा। बाजार में तेजी बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर के दम पर दिखी। हालांकि, व्यापक बाजार में सुस्ती थी; Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.4% गिर गया, जबकि Smallcap 100 इंडेक्स सपाट बंद हुआ। धातु (Metals), फार्मा और ऑटो सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया, जो दिखाता है कि ट्रेडर्स अभी भी बड़े और स्टेबल शेयरों को ही तरजीह दे रहे हैं।

आगे की चाल को समझने के लिए निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा पर नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.