8th Central Pay Commission के दायरे को लेकर हलचल तेज हो गई है। DoPT ने Department of Expenditure को एक अहम प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन समीक्षा शामिल करने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगी संगठनों के भारी दबाव के बाद Department of Personnel & Training (DoPT) ने 8th Central Pay Commission (CPC) के 'Terms of Reference' की समीक्षा शुरू कर दी है। 31 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट किया गया कि DoPT ने औपचारिक रूप से Department of Expenditure को सिफारिशें भेजी हैं, ताकि उन पूर्व सरकारी कर्मचारियों को भी दायरे में लिया जा सके जो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए थे।
क्यों बढ़ रहा है विवाद?
8th CPC का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि, पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि मौजूदा मैंडेट में पुराने रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में बदलाव की स्पष्ट गारंटी नहीं है। इसमें प्रमुख रूप से All India Defence Employees’ Federation और पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन शामिल हैं, जो सरकार से पुराने वेतन आयोगों, विशेषकर 4th CPC के पैटर्न को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
फिस्कल इम्पैक्ट और भविष्य की राह
यह मामला भारत के करीब 65 लाख केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के लिए बेहद अहम है। यदि सरकार इस संशोधन को मंजूरी देती है, तो सरकारी खजाने पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वर्तमान में DoPT का यह कदम केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन अगर Department of Expenditure इसे स्वीकार करता है, तो सरकार को अपनी लागत संबंधी अनुमानों (Cost Projections) को फिर से कैलकुलेट करना होगा। मार्केट और आर्थिक जानकारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार इस वित्तीय बोझ को संभालने के लिए क्या कदम उठाती है।
