14 अक्टूबर, 2026 तक डायरेक्ट टैक्स रिफंड में पिछले साल के मुकाबले **24.22%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह आंकड़ा **₹2.65 लाख करोड़** तक पहुंच गया है। हालांकि, एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेसिंग तेज हुई है, लेकिन डेटा मिसमैच और वेरिफिकेशन के कारण कई टैक्सपेयर्स को अभी भी रिफंड का इंतजार है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 14 अक्टूबर, 2026 तक ₹2,65,199 करोड़ के डायरेक्ट टैक्स रिफंड प्रोसेस किए हैं। यह पिछले साल की इसी अवधि के ₹2,13,491.41 करोड़ के मुकाबले 24.22% की बड़ी तेजी है। रिफंड में यह इजाफा एडमिनिस्ट्रेशन की सुधरी रफ्तार को दर्शाता है, फिर भी 2026-27 असेसमेंट ईयर के कई टैक्सपेयर्स अभी भी अपने फंड का इंतजार कर रहे हैं।
ऑटोमेटेड रिकॉन्सिलिएशन का असर
सिस्टम के ऑटोमेटेड होने से काम तो तेज हुआ है, लेकिन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए यह कई बार बाधा भी बन जाता है। टैक्स रिटर्न फाइल होते ही डिपार्टमेंट का सिस्टम उसे TDS, TCS और एडवांस टैक्स के डेटा से मैच करता है। यदि फॉर्म 26AS, AIS या TIS में कोई भी अंतर दिखता है, तो सिस्टम रिफंड को होल्ड पर डाल देता है और टैक्स ऑफिस को इसे मैन्युअल रूप से ठीक करना पड़ता है।
देरी के प्रमुख कारण
डेटा मिसमैच के अलावा, रिफंड अटकने का एक बड़ा कारण बैंक अकाउंट का PAN से लिंक न होना या गलत जानकारी होना है। यदि बैंक अकाउंट इनएक्टिव है या नाम में कोई स्पेलिंग मिस्टेक है, तो ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है। साथ ही, अगर पिछले सालों का कोई टैक्स बकाया है, तो डिपार्टमेंट रिफंड को उससे एडजस्ट कर देता है, जिससे मिलने वाली राशि कम हो सकती है या देरी हो सकती है।
अपना स्टेटस कैसे चेक करें?
अगर आपका रिफंड लंबे समय से अटका हुआ है, तो तुरंत ऑफिशियल ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर स्टेटस चेक करें। वहां किसी भी पेंडिंग नोटिस या डिमांड को देखें और उसका जवाब दें। अपने बैंक अकाउंट को पोर्टल पर 'प्री-वैलिडेट' करना बेहद जरूरी है। यदि सब कुछ सही होने के बाद भी रिफंड नहीं आ रहा है, तो पोर्टल के जरिए शिकायत (Grievance) दर्ज करना ही एकमात्र रास्ता है, ताकि मामला सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) के संज्ञान में आ सके।
