विकासशील देशों पर कर्ज का पहाड़: ब्याज चुकाने में खर्च किए **$1 ट्रिलियन**, ठप हो रहा विकास

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
विकासशील देशों पर कर्ज का पहाड़: ब्याज चुकाने में खर्च किए **$1 ट्रिलियन**, ठप हो रहा विकास

विकासशील अर्थव्यवस्थाओं ने साल 2025 में अपने पब्लिक डेट (Public Debt) पर करीब **$1 ट्रिलियन** का ब्याज चुकाया है। अमीर देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगे कर्ज के कारण इन देशों की सरकारों को हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्रों में बजट में कटौती करनी पड़ रही है, जो ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा खतरा है।

यूनाइटेड नेशन्स कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) की एक नई रिपोर्ट ने दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने खड़े एक बड़े वित्तीय संकट को उजागर किया है। साल 2025 में इन देशों ने पब्लिक डेट के नेट इंटरेस्ट के तौर पर लगभग $995 बिलियन का भुगतान किया है। यह आंकड़ा 2010 के स्तर से लगभग 3 गुना ज्यादा है। गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया भर में कुल पब्लिक डेट बढ़कर $111 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

कर्ज की असमानता का संकट

इस समस्या की जड़ विकासशील और विकसित देशों के बीच उधार लेने की लागत (Borrowing Cost) में भारी अंतर है। विकासशील देश फिलहाल अपने कर्ज पर औसतन 5.2% की ब्याज दर चुका रहे हैं, जबकि विकसित देशों के लिए यह दर महज 2.2% है। यह अंतर विकास की राह में एक बहुत बड़ी दीवार बन गया है, जिससे सरकारों के लिए अपना फाइनेंशियल मैनेजमेंट संभालना मुश्किल हो गया है।

विकास बनाम कर्ज का भुगतान

लगभग 3.7 अरब की आबादी वाले 51 देशों के लिए स्थिति और भी गंभीर है। इन देशों में कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च होने वाली रकम, प्राथमिक स्वास्थ्य या शिक्षा पर होने वाले कुल सरकारी खर्च से भी ज्यादा हो गई है। इसका नतीजा यह है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सर्विस के बजाय सरकारी खजाने का बड़ा हिस्सा ब्याज के भुगतान में बह रहा है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन देशों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं जैसी दरों पर पूंजी मिल सके, तो वे सालाना करीब $500 बिलियन की बचत कर सकते हैं। यह अतिरिक्त फंड लाखों हेल्थ क्लीनिक बनाने या 1 अरब से अधिक बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हो सकता है। हालांकि, मौजूदा रुझान संकेत दे रहे हैं कि जब तक वैश्विक स्तर पर डेट रिस्ट्रक्चरिंग (Debt Restructuring) और सस्ते फाइनेंसिंग की सुविधा नहीं मिलती, तब तक इन देशों की आर्थिक प्रगति पर तलवार लटकी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.