दिल्ली सरकार वर्ल्ड बैंक की B-READY रिपोर्ट में खराब प्रदर्शन के बाद बड़े प्रशासनिक सुधारों की शुरुआत कर रही है। 'दिल्ली लैंड स्टैक' और नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल लाया जाएगा, जिसका मकसद प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और कंस्ट्रक्शन अप्रूवल को तेज करना है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट से दिल्ली की चिंता बढ़ी
वर्ल्ड बैंक की हालिया 'बिजनेस रेडी' (B-READY) असेसमेंट में दिल्ली के खराब प्रदर्शन के बाद, प्रशासन ने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने का ऐलान किया है। इस मूल्यांकन में राजधानी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और कंस्ट्रक्शन परमिट अप्रूवल जैसी जरूरी सेवाओं में बड़ी अड़चनों को उजागर किया गया था। कारोबारों और निवेशकों के लिए यह खबर अहम है क्योंकि यह उन पुरानी प्रक्रियाओं की दिक्कतों को बताती है, जिनसे प्रोजेक्ट में देरी और कार्यकुशलता पर असर पड़ता है।
'दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल' और 'दिल्ली लैंड स्टैक'
इन दिक्कतों को दूर करने के लिए, सरकार 'दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' पेश कर रही है। इस बिल का मकसद सिंगल विंडो सिस्टम लाकर विभिन्न परमिट प्रक्रियाओं को एक जगह लाना है। इसका एक बड़ा हिस्सा 'दिल्ली लैंड स्टैक' पहल है। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA), दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) जैसी अलग-अलग अथॉरिटीज के लैंड और प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स को एक साथ लाकर, सरकार एक सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस बनाना चाहती है। इसका लक्ष्य मैन्युअल, कई विभागों के चक्कर लगाने वाली प्रक्रिया से डिजिटल, फेसलेस और समयबद्ध अप्रूवल की ओर बढ़ना है।
रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा?
निवेशकों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए, अगर ये बदलाव प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में लगने वाला समय और लागत कम हो सकती है। फिलहाल, यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर की कमी और विभिन्न एजेंसियों में रिकॉर्ड का बिखरा होना, ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) और प्रोजेक्ट शुरू करने में देरी का कारण बनता है। राज्य कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन पर भी विचार कर रहा है, जिससे कारोबारों पर कंप्लायंस का बोझ कम हो सके।
बड़े एग्जीक्यूशन रिस्क
हालांकि, सुधारों का रास्ता एग्जीक्यूशन (Execution) के बड़े जोखिमों से भरा है। 'दिल्ली लैंड स्टैक' की सफलता पूरी तरह से DDA और विभिन्न नगर निगम निकायों जैसी स्वतंत्र एजेंसियों के सहयोग और डेटा इंटीग्रेशन पर निर्भर करती है, जो ऐतिहासिक रूप से अलग-अलग काम करती आई हैं। इसके अलावा, 'दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल' अभी एक प्रस्ताव है, जिसे कानून बनने से पहले और अधिक विधायी और मंत्रिस्तरीय मंजूरी की आवश्यकता होगी। निवेशकों को बिल के पास होने की समय-सीमा पर नजर रखनी चाहिए और, सबसे महत्वपूर्ण, यह देखना चाहिए कि क्या डिजिटल सिस्टम वास्तव में इंटीग्रेट हो पाते हैं और जमीन पर काम करते हैं, क्योंकि वर्तमान प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अभी भी कई मामलों में मैन्युअल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
अगला महत्वपूर्ण अपडेट हितधारकों के लिए 2026 बिल पर प्रगति और क्या राज्य अगले समीक्षा चक्र तक लैंड रिकॉर्ड्स के लिए अपने इंटीग्रेशन लक्ष्यों को पूरा कर पाएगा, इस पर होगा। निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि क्या ये प्रशासनिक बदलाव जमीन पर प्रोजेक्ट अप्रूवल को तेज करते हैं या स्थानीय एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से देरी जारी रहती है।
