दिल्ली हाई कोर्ट ने सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर के लिए अनिवार्य आधार (Aadhaar) वेरिफिकेशन को लेकर केंद्र सरकार और बड़ी सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी किया है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू इस नियम के तहत वेरिफिकेशन न होने पर उपभोक्ताओं को मार्केट रेट पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। अब 18 नवंबर की सुनवाई पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
कोर्ट की दखल और कानूनी पेंच
दिल्ली हाई कोर्ट ने सब्सिडी वाले कुकिंग गैस के लिए बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन की अनिवार्यता पर संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की बेंच ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के साथ-साथ Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) को औपचारिक नोटिस जारी किया है।
यह नियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है, जिसके तहत सब्सिडी पाने के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी है। ऐसा न करने पर उपभोक्ता को सब्सिडी नहीं मिल रही और उन्हें 5 किलो या 10 किलो के छोटे सिलेंडर मार्केट रेट पर खरीदने पड़ रहे हैं। एडवोकेट पुलकित लूथरा द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि यह फैसला बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए तकनीकी बाधाएं पैदा कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 89.9% उपभोक्ता पहले ही वेरिफिकेशन पूरा कर चुके हैं।
तेल कंपनियों पर क्या होगा असर?
निवेशकों के लिए मुख्य मॉनिटरिंग पॉइंट सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) का सब्सिडी वितरण तंत्र है। हालांकि यह नीति राजकोषीय लीकेज को कम करने के लिए लाई गई है, लेकिन किसी भी प्रकार का न्यायिक हस्तक्षेप वितरण प्रक्रिया में अस्थाई रुकावटें पैदा कर सकता है। हालांकि इन कंपनियों का मुख्य मुनाफा अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों और ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन पर निर्भर करता है, लेकिन सरकारी नीति में बदलाव से ऑपरेशन्स पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को तय की गई है। इस दिन कोर्ट द्वारा दिया जाने वाला कोई भी अंतरिम निर्देश देश भर में इस नीति के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकता है, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी चाहिए।
