Delhi का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) **312** के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। इस प्रदूषण के कारण अब GRAP Stage 2 के सख्त नियम लागू होने की आशंका है, जिससे NCR में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों का कामकाज प्रभावित हो सकता है।
ठंड की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की हवा जहरीली होने लगी है। 2 नवंबर, 2026 की सुबह शहर का AQI 312 दर्ज किया गया, जो 'Very Poor' कैटेगरी में आता है। पिछले हफ्ते बारिश के चलते मिली राहत के बाद अब एक बार फिर गिरते तापमान और कम हवा की गति ने प्रदूषण के कणों को सतह पर जमा करना शुरू कर दिया है।\n\n### बिजनेस पर रेगुलेटरी रिस्क\n\nप्रदूषण के इस स्तर को देखते हुए अब Commission for Air Quality Management (CAQM) पर GRAP (Graded Response Action Plan) के दूसरे चरण को लागू करने का दबाव बढ़ गया है। अगर GRAP Stage 2 लागू होता है, तो कंपनियों को सख्त नियमों का सामना करना पड़ेगा। इसमें कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक, भारी वाहनों की आवाजाही पर रिस्ट्रिक्शंस और इंडस्ट्रियल इलाकों में डीजल जेनरेटर के उपयोग पर पाबंदी जैसे सख्त कदम शामिल हो सकते हैं।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\n\nNCR क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस, लॉजिस्टिक हब और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। ऐसे में कंस्ट्रक्शन बैन से रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है, जिससे लागत बढ़ना तय है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।\n\nहालांकि बाजार में अभी कोई पैनिक नहीं है, लेकिन Central Pollution Control Board (CPCB) के अगले नोटिफिकेशन्स पर नजर रखना जरूरी है। जो कंपनियां NCR में अधिक एक्सपोजर रखती हैं, उनके ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी पर आने वाला यह संकट निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर बना हुआ है।
