DPIIT ने 'ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस' की ओर बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 48,000 कंप्लायंस (Compliance) नियमों को हटा दिया है। इस बदलाव से कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च में कमी आएगी और बिजनेस प्रोसेस की रफ्तार बढ़ेगी।
सरकार ने बिजनेस करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी ओवरहाल (Regulatory Overhaul) शुरू किया है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने 47,957 अनुपालन आवश्यकताओं को या तो पूरी तरह खत्म कर दिया है या उनमें बदलाव किया है। इस कवायद में 4,271 नियमों को पूरी तरह हटा दिया गया है और 5,255 प्रावधानों को डीक्रिमिनलाइज (Decriminalize) किया गया है, ताकि कंपनियों को रोजमर्रा के काम में कानूनी अड़चनों का सामना न करना पड़े।
स्टार्टअप्स और ऑपरेशंस पर असर
सरकार 'जन विश्वास एक्ट्स' के जरिए 2023 से 2026 के बीच करीब 900 प्रावधानों को डीक्रिमिनलाइज कर चुकी है, जिससे छोटी-मोटी गलतियों पर कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई का खतरा कम हुआ है। स्टार्टअप सेक्टर के लिए 'क्रेडिट गारंटी स्कीम' के तहत गारंटी कवर को बढ़ाकर ₹20 करोड़ प्रति उधारकर्ता कर दिया गया है। इसके अलावा, 27 चैंपियन सेक्टर्स के लिए फीस को 1% पर सीमित कर दिया गया है। वर्तमान में भारत में 2,50,046 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं, जो 25 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा कर रहे हैं।
डिजिटल एकीकरण और निवेश का रिकॉर्ड
'नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम' (NSWS) अब इस बदलाव का मुख्य डिजिटल इंजन बन गया है। इसमें 34 राज्य और 32 केंद्रीय मंत्रालय जुड़े हैं, जिन्होंने अब तक 8,50,000 से ज्यादा मंजूरियां दी हैं। इस प्रशासनिक सुधार का असर विदेशी निवेश पर भी दिखा है, और फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत को रिकॉर्ड $94.53 बिलियन का FDI प्राप्त हुआ है।
आगे क्या देखना जरूरी है?
भले ही ये कदम सकारात्मक हैं, लेकिन इनका असली फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्यों के स्तर पर इनका क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है। निवेशक अब चार नए 'लेबर कोड्स' के पूरी तरह से लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये केंद्र के सुधार जमीन पर कितनी तेजी से प्रोजेक्ट्स की मंजूरी और ऑपरेशनल कॉस्ट में कमी के रूप में तब्दील होते हैं।
