भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDPA) मई **2027** से पूरी तरह लागू होने जा रहा है। कंपनियों के लिए सख्त डेटा प्राइवेसी नियम अनिवार्य होंगे, जिसका सीधा असर IT खर्च और मार्जिन पर पड़ सकता है।
भारत अब डेटा प्राइवेसी के एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है। DPDPA 2023 के तहत कंपनियों को अपने इंटरनल सिस्टम को पूरी तरह बदलना होगा। नवंबर 2025 में नियमों की घोषणा के बाद से ही बड़ी कॉर्पोरेट्स अपनी डेटा हैंडलिंग प्रक्रिया को दुरुस्त करने में जुट गई हैं।\n\n### निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?\n\nइस नए कानून के लागू होने से कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च में बड़ा बदलाव आएगा। पुरानी IT इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी, डेटा मैनेजमेंट और कंसेंट सिस्टम पर मोटा निवेश करना होगा। जो कंपनियां इन मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगी, उन पर भारी जुर्माना लग सकता है, जिसका सीधा असर उनके नेट प्रॉफिट पर दिखेगा।\n\n### कौन से सेक्टर हैं रडार पर?\n\nसबसे अधिक दबाव फिनटेक, ई-कॉमर्स, डिजिटल बैंकिंग और हेल्थ-टेक कंपनियों पर होगा, क्योंकि ये सेक्टर बड़े पैमाने पर यूजर डेटा का इस्तेमाल करते हैं।\n\n- कंपटीटिव एडवांटेज: जिन कंपनियों की साइबर सिक्योरिटी पहले से मजबूत है, उन्हें नई चुनौतियों के साथ तालमेल बिठाने में आसानी होगी।\n- सावधानी: आगामी तिमाही नतीजों और एनुअल रिपोर्ट्स के दौरान मैनेजमेंट द्वारा किए जाने वाले IT स्पेंडिंग और साइबर बजट के खुलासों पर नजर रखना जरूरी है।\n\nनिवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनियां अपनी ग्रोथ और प्राइवेसी कंप्लायंस के बीच सही संतुलन बना पा रही हैं या नहीं।
