कर्नाटक के डिप्टी सीएम DK Shivakumar ने अपने **₹1,400 करोड़** के एसेट पोर्टफोलियो का बचाव किया है। यह सफाई उन्होंने केंद्रीय मंत्री HD Kumaraswamy द्वारा Bengaluru-Mysuru Infrastructure Corridor Project (BMICP) में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद दी है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (NICE) द्वारा विकसित यह प्रोजेक्ट अब राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
जांच के दायरे में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
केंद्रीय मंत्री HD Kumaraswamy ने आरोप लगाया है कि शिवकुमार के शहरी विकास मंत्री के कार्यकाल के दौरान इस प्रोजेक्ट में बिना अनुमति के बदलाव किए गए थे। यह प्रोजेक्ट लंबे समय से भूमि अधिग्रहण और कानूनी विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। जो निवेशक पब्लिक-प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को ट्रैक कर रहे हैं, उनके लिए इन लंबे समय के एग्रीमेंट्स की स्थिरता काफी अहम है, क्योंकि प्रशासनिक चुनौतियों से प्रोजेक्ट की गति पर असर पड़ सकता है।
संपत्ति पर स्पष्टीकरण
अपनी निजी संपत्ति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए शिवकुमार ने कहा कि उनकी ₹1,400 करोड़ की कुल संपत्ति पूरी तरह से कानूनी है और इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास डिक्लेयर किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Sobha Developers जैसी कंपनियों में उनके निवेश की वैल्यू में जो बढ़ोतरी हुई है, वह वैध तरीके से हुई है। उन्होंने कहा कि उनके वित्तीय रिकॉर्ड पारदर्शी हैं और किसी भी जांच के लिए उपलब्ध हैं।
स्टेकहोल्डर्स पर क्या होगा असर?
यह विवाद भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यदि सरकारी एजेंसियां इस प्रोजेक्ट की कंप्लायंस हिस्ट्री की जांच करती हैं, तो इसका असर इसके एडमिनिस्ट्रेटिव ढांचे पर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या केंद्र या राज्य की जांच एजेंसियां इसमें औपचारिक रूप से दखल देती हैं या NICE द्वारा इस पर क्या आधिकारिक बयान आता है।
