Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने एक नई Open API सुविधा शुरू की है, जिससे निर्यातक (Exporters) अपने आंतरिक ERP सिस्टम को सीधे सरकारी CoO पोर्टल से जोड़ सकेंगे। **7 सितंबर, 2026** से प्रभावी यह बदलाव मैनुअल डेटा एंट्री के झंझट को खत्म करेगा और सर्टिफिकेट प्रोसेसिंग की रफ्तार बढ़ाएगा।
अब सीधे मशीन-टू-मशीन बात करेंगे सिस्टम
DGFT द्वारा जारी Trade Notice No. 25/2026-27 के तहत अब एक्सपोर्टर्स को बार-बार सरकारी पोर्टल पर जाकर डेटा भरने की जरूरत नहीं होगी। नई API सुविधा के जरिए कंपनियां अपने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर को सरकारी प्लेटफॉर्म के साथ सिंक (Sync) कर सकेंगी। इससे 'डुप्लीकेट डेटा एंट्री' और मानवीय गलतियों (Manual Errors) की संभावना खत्म हो जाएगी।
यह सुविधा प्रिफरेंशियल (Preferential) और नॉन-प्रिफरेंशियल, दोनों तरह के सर्टिफिकेट्स के लिए काम करेगी। जो कंपनियां बड़ी मात्रा में शिपमेंट हैंडल करती हैं, उनके लिए यह समय और लागत दोनों बचाने वाला कदम है।
सुरक्षा और तकनीकी मानक
इस सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए DGFT ने तीन मुख्य API घटक पेश किए हैं—Authentication Token API, CoO File API और Certificate Verification API। डेटा की सुरक्षा के लिए SHA-256 RSA डिजिटल सिग्नेचर और IP-आधारित एक्सेस जैसे कड़े सुरक्षा मानकों को लागू किया गया है। कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत रखें और एक्सेस टोकन का सावधानी से प्रबंधन करें।
सरकारी डिजिटल मुहिम का हिस्सा
यह कदम भारत सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत एक्सपोर्ट प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके। इसी सिलसिले में 1 सितंबर, 2026 को फ्री सेल और कॉमर्स सर्टिफिकेट के जारी होने की प्रक्रिया को भी ऑटोमेट किया गया था। अब एक्सपोर्टर्स को अपनी IT टीम के साथ मिलकर अपने सिस्टम को नए API स्पेसिफिकेशन्स के हिसाब से अपग्रेड करना होगा।
