DGFT ने एक्सपोर्टर्स के लिए RELIEF लॉजिस्टिक सपोर्ट स्कीम की डेडलाइन को **31 मार्च, 2027** तक बढ़ा दिया है। पश्चिम एशियाई देशों में जारी तनाव के कारण बढ़ते फ्रेट और इंश्योरेंस खर्च से जूझ रही कंपनियों के लिए यह बड़ी राहत है।
राहत का कदम और नई डेडलाइन
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने अपनी 'रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन' यानी RELIEF स्कीम के दूसरे हिस्से को आधिकारिक तौर पर आगे बढ़ा दिया है। 30 सितंबर, 2026 को जारी नोटिफिकेशन के जरिए सरकार ने इसे 31 मार्च, 2027 तक के लिए एक्सटेंड कर दिया है। यह कदम भारतीय एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल ट्रेड में आ रही दिक्कतों से निपटने के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय देता है।
क्यों पड़ी जरूरत?
इस फैसले की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशियाई जल क्षेत्रों में जारी अस्थिरता है। जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण शिपिंग कंपनियों को स्वेज नहर (Suez Canal) वाला रूट छोड़कर 'केप ऑफ गुड होप' से लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इस बदलाव से फ्यूल की खपत और ट्रांजिट टाइम काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर फ्रेट और इंश्योरेंस प्रीमियम पर पड़ा है। अगर यह लागत बढ़ती रही, तो भारतीय एक्सपोर्टर्स के नेट प्रॉफिट मार्जिन पर गहरा असर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
यह स्कीम उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर हो सकती है, जो टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। यह सरकारी मदद कंपनियों को अपनी कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग बनाए रखने में मदद करेगी।
निवेशकों को अब कंपनियों की आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) पर नजर रखनी चाहिए कि वे इस स्कीम का कितना फायदा उठा पा रही हैं और अपनी वर्किंग कैपिटल को कैसे मैनेज कर रही हैं।
