DGFT ने ATS-8 और Sulfadiazine पर बढ़ाई इम्पोर्ट प्राइस लिमिट, दवा कंपनियों के लिए क्या हैं मायने?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
DGFT ने ATS-8 और Sulfadiazine पर बढ़ाई इम्पोर्ट प्राइस लिमिट, दवा कंपनियों के लिए क्या हैं मायने?

सरकार की ओर से फार्मा सेक्टर के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने ATS-8 और Sulfadiazine API पर मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस (MIP) को **30 नवंबर, 2026** तक बढ़ा दिया है। इस कदम का मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को सस्ते विदेशी इम्पोर्ट से बचाना है।

तय की गई नई कीमतें

DGFT के आदेश के मुताबिक, अब 30 नवंबर, 2026 तक ATS-8 और Sulfadiazine API के लिए एक तय न्यूनतम कीमत लागू रहेगी। नए नियमों के तहत ATS-8 के लिए फ्लोर प्राइस USD 111 प्रति किलोग्राम और Sulfadiazine API के लिए USD 1,774 प्रति किलोग्राम तय किया गया है।

घरेलू कंपनियों को फायदा या चुनौती?

यह फैसला भारतीय API मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाला सस्ता माल भारतीय बाजार को खराब न करे। इससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, दवा बनाने वाली उन कंपनियों के लिए यह स्थिति थोड़ी जटिल हो सकती है जो इन रॉ मटेरियल्स का भारी मात्रा में इस्तेमाल करती हैं। अब ये कंपनियां वैश्विक स्तर पर कीमतों में आने वाली गिरावट का फायदा नहीं उठा पाएंगी, क्योंकि उन्हें कम से कम तय की गई कीमतों पर ही माल मंगवाना होगा। इससे कंपनियों की रॉ मटेरियल लागत स्थिर तो रहेगी, लेकिन उसमें फ्लेक्सिबिलिटी की कमी आ जाएगी।

निवेशकों के लिए संकेत

फार्मा सेक्टर के निवेशकों को अब कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर पैनी नजर रखनी चाहिए। यह नीति 'मेक इन इंडिया' के तहत सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या घरेलू मैन्युफैक्चरर्स मांग के हिसाब से अपना उत्पादन बढ़ा पाते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.