बंगाल की खाड़ी में उठा Cyclone Murasu अब और खतरनाक हो गया है। 3 नवंबर की सुबह तक इसके आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच टकराने की संभावना है। Cyclone Arnab के बाद आए इस नए संकट ने तटीय इलाकों में बुनियादी ढांचे और कृषि को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाई अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि बंगाल की खाड़ी का गहरा दबाव अब Cyclonic Storm Murasu में बदल चुका है। यह सिस्टम फिलहाल पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है और तट से टकराने तक इसके और अधिक भीषण रूप लेने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 नवंबर की सुबह तक हवा की रफ्तार 100 से 110 किमी प्रति घंटा हो सकती है, जो झोंकों में 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।\n\n### अर्थव्यवस्था और निवेश पर असर\nहाल ही में Cyclone Arnab की तबाही के बाद एक बार फिर आए इस चक्रवात से तटीय जिलों की आर्थिक स्थिरता पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। यह इलाका मुख्य रूप से एक्वाकल्चर, धान और बागवानी का हब है। \n\nनिवेशकों और आर्थिक जानकारों के लिए ये चिंता के प्रमुख बिंदु हैं:\n\n* सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स: बंदरगाहों (Ports) का संचालन रुकने से मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ सकता है।\n* कृषि नुकसान: भारी बारिश और तेज हवाओं से फसलें बर्बाद होने की आशंका है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।\n* सरकारी खर्च: बिजली के खंभों और सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे के नुकसान की मरम्मत के लिए राज्य और केंद्र सरकार को बड़े फंड की आवश्यकता होगी।\n\n### बचाव कार्य जारी\nफिलहाल NDRF ने निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। मछुआरों को 4 नवंबर तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि टकराते समय तूफान की असल तीव्रता क्या रहती है और प्रशासन कितनी तेजी से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर पाता है।
