Right Horizons के अनिल रेगो ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतें अगर **100 डॉलर** के आसपास बनी रहीं, तो यह भारत की जीडीपी ग्रोथ पर दबाव डाल सकती हैं। हालांकि अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन निवेशकों को अब वैल्यूएशन के बजाय कंपनियों के अर्निंग परफॉर्मेंस पर ध्यान देना चाहिए।
आर्थिक मोर्चे पर बड़ी चुनौती
Right Horizons के फाउंडर अनिल रेगो का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी बाधा बन सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में 100 डॉलर प्रति बैरल की कीमतें देश की 7.5% से 8% की जीडीपी ग्रोथ को बनाए रखने में चुनौती पैदा कर सकती हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8% की ग्रोथ जरूर देखी गई है, लेकिन ऊर्जा की ऊंची लागत भविष्य में मुनाफे और महंगाई पर असर डाल सकती है।
अर्निंग-लेड मार्केट की ओर बदलाव
भारतीय शेयर बाजार अब केवल हाई वैल्यूएशन के दौर से बाहर निकलकर असल मुनाफे (Earnings) पर केंद्रित हो रहा है। Nifty 50 कंपनियों का प्रॉफिट 18% बढ़ा है, जो पिछले 2 साल में सबसे ज्यादा है। अब निवेश के लिए ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर नजर रखना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और AI का दम
लंबे समय के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर बड़े ग्रोथ ड्राइवर के रूप में उभर रहे हैं। 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिजली और औद्योगिक सेक्टर में भारी निवेश की उम्मीद है, जिससे ट्रांसफार्मर और ग्रिड उपकरण बनाने वाली कंपनियों को फायदा मिल सकता है।
बैंकिंग और रियल एस्टेट का हाल
ऊंची ब्याज दरों का असर मिड-इनकम हाउसिंग सेक्टर पर दिख रहा है, हालांकि रियल एस्टेट की मांग अभी भी स्थिर है। बैंकिंग सेक्टर में HDFC Bank जैसे बड़े नामों के स्टॉक पर नेगेटिव सेंटिमेंट पहले ही दिख चुका है। अब निवेशकों को बैंकों की डिपॉजिट जुटाने की क्षमता और लीडरशिप ट्रांजिशन पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
