ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर **$114** प्रति बैरल पहुंच गई हैं। गर्मियों के बाद से इसमें करीब **30%** का इजाफा हुआ है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने आगाह किया है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से भारत के लिए महंगाई का संकट और गहरा हो सकता है।
ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में आया यह उबाल चिंताजनक है। गर्मियों के दौरान जो दाम $85 के आसपास थे, वे अब $114 तक पहुंच चुके हैं। अगस्त से सितंबर के बीच भारत के इम्पोर्ट बास्केट में करीब 30% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिस पर मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने देश की आर्थिक स्थिरता को लेकर चेतावनी दी है।
ग्लोबल एनर्जी में बड़ा बदलाव
कीमतों में यह तेजी 1990 से 2020 के बीच रही उस दौर का अंत है जब ग्लोबल इकोनॉमी में महंगाई काफी कम थी। मौजूदा संकट सिर्फ यूक्रेन संघर्ष या फारस की खाड़ी के तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इकोनॉमिक पॉलिसी का फोकस ट्रेड, टेक्नोलॉजी और एनर्जी पर शिफ्ट हो चुका है। भारत के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखना अब सबसे बड़ी चुनौती है।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर का असर
ऊर्जा की बढ़ती मांग के पीछे एक बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर है। AI डेटा सेंटर्स को भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है, जिससे बिजली की मांग में संरचनात्मक (Structural) बदलाव आया है। भले ही भू-राजनीतिक तनाव कम हो जाएं, लेकिन AI से जुड़ी यह मांग कमोडिटी और एनर्जी की कीमतों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखेगी।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह स्थिति दबाव वाली है। कच्चे तेल पर निर्भर रहने वाली कंपनियां, जैसे कि पेंट बनाने वाली कंपनियां, टायर निर्माता और एविएशन सेक्टर, के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पड़ सकती है। इसके अलावा, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) भी दबाव में रह सकती हैं। ऊंचे क्रूड ऑयल दाम भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) और रुपये की चाल को भी बिगाड़ सकते हैं। निवेशकों को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली कमेंट्री और ट्रेड बैलेंस डेटा पर कड़ी नजर रखनी होगी।
