होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच Brent crude **$108** के पार पहुँच गया है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। DIIs की **45** दिन की खरीदारी का सिलसिला थमने और फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार दबाव में है।
ग्लोबल संकट का असर
होरमुज जलडमरूमध्य में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें $108 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। भारत के लिए तेल आयात महंगा होने का सीधा असर महंगाई और सरकारी खजाने पर पड़ता है, जो बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर कर रहा है।
सेक्टर का हाल
जहाँ एक ओर तेल की कीमतों में तेजी से ONGC जैसे ऊर्जा उत्पादक शेयरों में उछाल देखने को मिला, वहीं बैंकिंग सेक्टर पर भारी दबाव दिखा। Axis Bank के शेयर 3.84% गिरकर ₹1,240.50 पर आ गए, जबकि HDFC Bank में भी 1.60% की गिरावट रही। चूंकि इंडेक्स में फाइनेंशियल शेयरों का वेटेज ज्यादा है, इसलिए इन हेवीवेट्स की कमजोरी बाजार को रिकवर करने नहीं दे रही है।
विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख
बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। FIIs (विदेशी संस्थागत निवेशक) फिर से खरीदार बने हैं और उन्होंने ₹1,166 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि, यह राहत तब कम हो गई जब DIIs (घरेलू संस्थागत निवेशक) ने ₹3,661 करोड़ के शेयर बेच दिए। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि DIIs की 45 दिनों की निरंतर खरीदारी का सिलसिला अब थम गया है, जो मार्केट में बढ़ती वोलाटिलिटी की बड़ी वजह है।
टेक्निकल चार्ट पर नजर
Nifty 50 अभी भी एक दायरे में फंसा है। 23,150 से 23,200 के रेजिस्टेंस लेवल को पार करना मुश्किल साबित हो रहा है, जबकि 23,000 और 22,900 के पास सपोर्ट बना हुआ है। अब ट्रेडर्स की निगाहें Bank Nifty पर हैं, जो अगर 56,000 के स्तर को पार करता है, तभी बैंकिंग सेक्टर में नई जान फूँकी जा सकती है।
