भारतीय कॉर्पोरेट जगत में 'Presenteeism' एक गंभीर संकट बन रहा है। कर्मचारी ऑफिस में मौजूद तो हैं, लेकिन मानसिक दबाव के कारण उनकी प्रोडक्टिविटी गिर रही है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क है, जो भविष्य में कंपनी की सस्टेनेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में 'हाई परफॉर्मेंस' के दावे अब एक गंभीर ऑपरेशनल समस्या को ढक रहे हैं, जिसे हम 'Presenteeism' कहते हैं। कंपनियां आमतौर पर 'Absenteeism' (अनुपस्थिति) को ट्रैक करती हैं, लेकिन 'Presenteeism' यानी दफ्तर में शारीरिक रूप से मौजूद रहकर भी मानसिक दबाव के कारण क्षमता से कम काम करना, कंपनियों को कहीं ज्यादा नुकसान पहुँचा रहा है। निवेशकों के लिए यह ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट में एक बड़ी कमजोरी है, जिसका असर कम इनोवेशन और छिपे हुए प्रोडक्टिविटी ड्रेन के रूप में दिखता है।
मेंटल हेल्थ का छिपा हुआ आर्थिक बोझ
Deloitte के डेटा के मुताबिक, खराब मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा आर्थिक बोझ केवल एम्प्लॉई टर्नओवर नहीं, बल्कि 'Presenteeism' है। जब कर्मचारी ADHD, OCD या डिप्रेशन जैसी समस्याओं के साथ काम करते हैं, तो वे ऊपर से ठीक दिखते हैं लेकिन उनकी आउटपुट क्षमता काफी कम होती है। मैनेजमेंट अक्सर इसे सिर्फ 'बर्नआउट' मानकर सतही वेलनेस प्रोग्राम चलाता है, जो समस्या की जड़ तक नहीं पहुँचते। इसका नतीजा यह होता है कि कंपनियां पूरी सैलरी देती हैं, लेकिन आउटपुट बेहद खराब मिलता है, जो सीधे मार्जिन और एफिशिएंसी को नुकसान पहुँचाता है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी (ESG का नजरिया)
ESG (Environmental, Social, and Governance) फ्रेमवर्क में कर्मचारी वेलनेस अब केवल एक 'सॉफ्ट' HR मुद्दा नहीं, बल्कि एक अहम गवर्नेंस मैट्रिक है। जो कंपनियां स्वस्थ कार्य संस्कृति बनाए रखने में नाकाम रहती हैं, वहां टैलेंट की कमी और लीडरशिप गैप का रिस्क बढ़ जाता है। यदि कोई कंपनी 'मास्किंग' कल्चर (मानसिक तनाव छिपाने की मजबूरी) पर टिकी है, तो वह एक अस्थिर माहौल बनाती है। ऐसे में ऑपरेशनल कैपेसिटी में अचानक गिरावट आना और प्रोजेक्ट्स में देरी होना आम बात है, जो वित्तीय रिपोर्ट्स में तब तक नहीं दिखती जब तक कंपनी के टारगेट्स मिस न हो जाएं।
सस्टेनेबिलिटी और भविष्य की रणनीति
निवेशकों को यह परखना होगा कि कंपनी की परफॉर्मेंस टिकाऊ है या कर्मचारियों पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव का नतीजा। जो कंपनियां इस संरचनात्मक समस्या को नजरअंदाज करती हैं, उनका प्रतिस्पर्धी लाभ धीरे-धीरे खत्म हो जाता है क्योंकि टॉप टैलेंट सस्टेनेबल वर्क कल्चर वाली कंपनियों की तरफ रुख कर लेता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
एनुअल रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट कमेंट्री पढ़ते समय इन बातों पर गौर करें: कर्मचारी रिटेंशन रेट्स, क्रॉस-टाइमजोन वर्क मैनेजमेंट की गुणवत्ता, और मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम की गहराई। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो सिर्फ वेलनेस पर्क्स देने के बजाय, वर्कलोड प्लानिंग और रिकवरी टाइम जैसे सिस्टेमिक बदलावों में निवेश कर रही हैं।
