Corporate India: अब कर्ज नहीं, अपनी कमाई से होगा विस्तार, कंपनियों की बदली रणनीति

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Corporate India: अब कर्ज नहीं, अपनी कमाई से होगा विस्तार, कंपनियों की बदली रणनीति

भारतीय कंपनियां अब कर्ज घटाने के दौर से निकलकर विस्तार (Expansion) के नए फेज में प्रवेश कर रही हैं। **16%** के शानदार रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और **9%** प्रॉफिट मार्जिन के दम पर कंपनियां अब बिना बाहरी कर्ज के अपने दम पर नई परियोजनाओं में पैसा लगा रही हैं।

प्राइवेट सेक्टर का नया दांव

भारतीय कॉरपोरेट जगत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 26 के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियां अब सरकारी बुनियादी ढांचे पर निर्भर रहने के बजाय खुद की वित्तीय मजबूती का इस्तेमाल नई परियोजनाओं के लिए कर रही हैं। इस बार की विकास गाथा प्राइवेट सेक्टर के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है।

आंकड़ों में मजबूती

कंपनी के बेहतर प्रदर्शन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लिस्टेड कंपनियों का रिटर्न ऑन इक्विटी 16% तक पहुंच गया है, जो महामारी से पहले के 11% से 12% के स्तर से कहीं ज्यादा है। इसका सबसे बड़ा कारण ऑपरेशनल दक्षता है, जहां नेट प्रॉफिट मार्जिन लगभग 9% पर पहुंच गया है। कंपनियों ने अपने बैलेंस शीट को काफी साफ कर लिया है, जिससे उन्हें कर्ज के बोझ के बिना काम करने की आजादी मिल रही है।

इंटरनल कैश फ्लो का दम

कंपनियां अब अपनी मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से अधिक कमाई करने में सक्षम हैं, जिसका फिक्स्ड-एसेट टर्नओवर रेशियो 2.1 गुना हो गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग कैश का 54% हिस्सा सीधे नए प्रोजेक्ट्स में फिर से निवेश कर रही हैं।

सरकारी स्कीम और भविष्य की चुनौती

सरकार की PLI (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम ने भी इस रफ्तार को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है, खासकर मोबाइल और सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग में। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि भविष्य में इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना और मार्केट में डिमांड की स्थिरता ही कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन की असली परीक्षा होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.