कॉपर की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है। Maruti Suzuki और Tata Motors जैसी दिग्गज कंपनियों को दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जो हाल ही में लंदन मेटल एक्सचेंज (London Metal Exchange) पर $14,500 प्रति टन के स्तर को छू गई हैं। रिन्यूएबल एनर्जी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के कारण कॉपर की सप्लाई पर दबाव है, जिसने ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कमर तोड़ दी है।
ऑटो सेक्टर में दाम बढ़ोतरी का दौर
कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर सीधा कंपनियों के बॉटम लाइन पर दिख रहा है। Maruti Suzuki ने मई 2026 के बाद से अब तक तीन बार कीमतें बढ़ाई हैं और हाल ही में सितंबर में कुछ मॉडल्स के दाम ₹20,000 तक बढ़ा दिए। वहीं, Tata Motors ने भी 1 सितंबर, 2026 से अपने पारंपरिक वाहनों और EV लाइनअप पर ₹25,000 तक की बढ़ोतरी की है। निवेशक अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या ये लगातार बढ़ती कीमतें डिमांड को कम कर देंगी।
EV कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) निर्माताओं के लिए समस्या और भी विकट है। पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में EV में तीन गुना ज्यादा कॉपर का इस्तेमाल होता है। बैटरी, मोटर और वायरिंग के लिए कॉपर अनिवार्य होने के कारण ये कंपनियां कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। उन्हें एक तरफ मार्जिन बचाना है, तो दूसरी तरफ EV को पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले सस्ता रखना है।
अप्लायंस मार्केट पर असर
AC और फ्रिज बनाने वाली कंपनियों के लिए भी हालात मुश्किल हैं। हीट एक्सचेंजर्स और कंडेंसर में कॉपर का उपयोग जरूरी होता है। यदि कंपनियां दाम नहीं बढ़ाती हैं, तो उनका मार्जिन गिरेगा, और अगर दाम बढ़ाती हैं, तो फेस्टिव सीजन में ग्राहकों की मांग कम होने का जोखिम बना रहेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
शेयरधारकों के लिए मुख्य चिंता आने वाली तिमाहियों में ऑपरेटिंग मार्जिन की है। हालांकि कंपनियों के पास पुराना स्टॉक हो सकता है, लेकिन नए स्टॉक की खरीदारी महंगी होने पर मार्जिन पर दबाव साफ नजर आएगा। यदि कच्चे माल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों को अपने एक्सपेंशन प्लान पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
