वाणिज्य मंत्रालय ने RELIEF प्रोग्राम को बेहतर बनाने के लिए 6-सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह पहल **₹25,060 करोड़** के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का हिस्सा है, जिसका मकसद एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की बढ़ती लागत से राहत दिलाना है।
राहत कार्यक्रम में आएगा सुधार
वाणिज्य मंत्रालय ने 'Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation' (RELIEF) प्रोग्राम की खामियों को दूर करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है। ₹25,060 करोड़ के इस बड़े एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का उद्देश्य उन भारतीय कंपनियों को सुरक्षा कवच देना है, जो शिपिंग इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स की मार झेल रही हैं।
कौन-कौन शामिल है इस कमेटी में?
इस पैनल में Directorate General of Foreign Trade (DGFT), वाणिज्य विभाग, वित्तीय सेवा विभाग और Export Credit Guarantee Corporation of India (ECGC) के अधिकारी शामिल हैं। इन विभागों को एक साथ लाकर सरकार का मुख्य जोर नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच तालमेल बिठाने पर है। यह टीम इस बात का विश्लेषण करेगी कि अब तक फंड्स का वितरण धीमा क्यों रहा और बजट का सही उपयोग कैसे किया जाए।
कंपनियों को क्या होगा फायदा?
हाल की तिमाहियों में लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ने से टेक्सटाइल, केमिकल और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स के मुनाफे पर असर पड़ा है। अब यह कमेटी उन स्ट्रक्चरल बाधाओं की पहचान करेगी, जिनकी वजह से एक्सपोर्टर्स को सरकारी मदद मिलने में दिक्कत आ रही थी। अगर यह कोशिश सफल रहती है, तो कंपनियों के कैश फ्लो में सुधार देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए नजरिया
जो निवेशक एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड शेयरों पर नजर रखते हैं, उनके लिए इस कमेटी की सिफारिशें बहुत महत्वपूर्ण होंगी। यदि फंड्स के वितरण में तेजी आती है, तो यह आने वाले समय में निर्यात करने वाली कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ को मजबूती दे सकता है।
