साइंस एडवांसेज (Science Advances) की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के लगभग 14.5 करोड़ बच्चे हर साल कम से कम एक अतिरिक्त महीने की खतरनाक 'हीट स्ट्रेस' झेल रहे हैं, जो भविष्य में हेल्थकेयर और कूलिंग टेक्नोलॉजी की मांग को नई दिशा दे सकता है।
साइंस एडवांसेज जर्नल में छपी एक हालिया स्टडी ने भारत के बच्चों के भविष्य पर मंडराते क्लाइमेट रिस्क को उजागर किया है। Vrije Universiteit Brussel के शोधकर्ताओं के मुताबिक, भारत के 61 प्रतिशत बच्चे, यानी कुल 14.5 करोड़ की आबादी, अब हर साल कम से कम एक महीने अतिरिक्त खतरनाक गर्मी का सामना कर रही है। यह डेटा वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के गंभीर शारीरिक और सिस्टमिक खतरों की ओर इशारा करता है।
'ह्यूमिड हीट' का खतरा
रिसर्च में 'ह्यूमिड हीट' (Humid Heat) को बच्चों के लिए सबसे खतरनाक बताया गया है। सूखी गर्मी के उलट, उमस भरी गर्मी शरीर के पसीने के जरिए ठंडक पाने के नेचुरल सिस्टम को ब्लॉक कर देती है। बच्चों का शरीर बड़ों के मुकाबले तापमान के प्रति अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है, जिससे उन्हें एग्जॉशन और ऑर्गन स्ट्रेस जैसी समस्याओं का खतरा अधिक होता है।
आर्थिक और स्ट्रक्चरल बदलाव
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य में कूलिंग टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ेगी। एयर कंडीशनिंग, बेहतर वेंटिलेशन सिस्टम और एनर्जी-एफिशिएंट बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है। जैसे-जैसे घर और दफ्तरों में तापमान को मैनेज करना जरूरी होता जाएगा, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
सरकारी नीति और भविष्य का दबाव
मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर सिस्टम पर भी भारी दबाव पड़ने वाला है। सरकार को अब लंबे समय तक गर्मी के कारण होने वाली बीमारियों के मैनेजमेंट पर अधिक बजट खर्च करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि ग्लोबल वॉर्मिंग 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ती है, तो प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़कर 16.6 करोड़ (74%) हो सकती है। अगर यह आंकड़ा 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, तो करीब 96% भारतीय बच्चे, यानी 16.9 करोड़ बच्चे इसकी चपेट में होंगे।
निवेशकों के लिए अब यह देखना जरूरी होगा कि सरकार पब्लिक हेल्थ और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कैसे निवेश करती है, और किस तरह से क्लाइमेट-रेजिलिएंट कंस्ट्रक्शन (Climate-resilient construction) को बढ़ावा दिया जाता है।
