प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा का दौरा करेंगे, वहीं भारत ने मालदीव के लिए **₹3,000 करोड़** के करेंसी स्वैप को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, चीन द्वारा **14** क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर निर्यात प्रतिबंध लगाने से भारतीय कंपनियों के लिए सप्लाई चेन का रिस्क बढ़ गया है।
कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर हलचल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर को कनाडा की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे, जिसका उद्देश्य भारत के कूटनीतिक और व्यापारिक प्रभाव को बढ़ाना है। विदेश मंत्रालय पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए सक्रिय है। इसी दिशा में सरकार ने मालदीव को आर्थिक स्थिरता देने के लिए ₹3,000 करोड़ की करेंसी स्वैप सुविधा को मंजूरी दी है, ताकि वहां लिक्विडिटी बढ़ाई जा सके।
चीन की नई पाबंदियों का असर
चीन ने 14 महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के निर्यात पर ड्राफ्ट प्लान पेश किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोलर कंपोनेंट्स जैसे हार्डवेयर शामिल हैं। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की भारतीय कंपनियों के सामने लागत बढ़ने और सप्लाई में देरी का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। निवेशकों को इन कंपनियों के मार्जिन्स पर नज़र रखनी होगी।
हेल्थकेयर और स्पेस सेक्टर में नई उम्मीदें
चुनौतियों के बीच, प्राइवेट सेक्टर में विकास के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। एक भारतीय कंपनी ने जर्मन निर्माता के साथ मिलकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी 'इम्युनोग्लोबुलिन' दवाओं के उत्पादन का समझौता किया है। वहीं, स्पेस सेक्टर में Skyroot Aerospace ने एक अमेरिकी स्टार्टअप के साथ करार किया है, जो ऑर्बिटल मिरर टेक्नोलॉजी पर काम करेगा। ये पार्टनरशिप्स ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाती हैं।
