China Manufacturing PMI: अगस्त में मामूली सुधार के बाद भी सुस्ती बरकरार, 49.8 पर अटका आंकड़ा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
China Manufacturing PMI: अगस्त में मामूली सुधार के बाद भी सुस्ती बरकरार, 49.8 पर अटका आंकड़ा

चीन का ऑफिशियल मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त में बढ़कर **49.8** रहा, जो जुलाई के **49.2** से थोड़ा बेहतर है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी **50** के थ्रेशोल्ड से नीचे है, जिसका मतलब है कि वहां का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी कॉन्ट्रैक्शन (संकुचन) की चपेट में है।

चीन का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार दूसरे महीने सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। हालांकि अगस्त का डेटा पिछले महीने के 49.2 से बेहतर होकर 49.8 पर पहुंचा है, लेकिन 50 के लेवल से नीचे रहने का मतलब है कि वहां फैक्ट्री एक्टिविटी में अभी भी गिरावट देखी जा रही है।

इकोनॉमी पर गहरा असर

चीन की अर्थव्यवस्था का हाल और भी चिंताजनक है। दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ रेट घटकर 4.3% रही, जो साल 2022 के अंत के बाद से सबसे निचला स्तर है। वहीं, नॉन-मैन्युफैक्चरिंग PMI (जो सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को ट्रैक करता है) 49.0 पर बना हुआ है, जो दिखाता है कि दिक्कत सिर्फ फैक्टरियों तक ही सीमित नहीं है।

कमोडिटी मार्केट के लिए चेतावनी

निवेशकों के लिए चीन का औद्योगिक डेटा एक 'बैलेंस शीट' की तरह है। चीन दुनिया में रॉ मटेरियल का सबसे बड़ा खरीदार है। जब वहां की मैन्युफैक्चरिंग सुस्त होती है, तो स्टील, ऑयल और इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग गिर जाती है। इसका सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी कीमतों पर पड़ता है। भारतीय निवेशकों के लिए यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि चीन की सुस्ती से भारतीय मेटल और एनर्जी कंपनियों के मुनाफे और प्राइसिंग पावर पर दबाव बढ़ सकता है।

प्रॉपर्टी सेक्टर की मुसीबत और उम्मीद की किरण

मौजूदा गिरावट की मुख्य वजह वहां का लंबे समय से चल रहा प्रॉपर्टी सेक्टर का संकट है, जिसने कंज्यूमर सेंटीमेंट और घरेलू निवेश को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। हालांकि, एक्सपोर्ट के मोर्चे पर राहत है। टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का एक्सपोर्ट अभी भी मजबूती दे रहा है, जो चीन के मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट के लिए एक बफर का काम कर रहा है।

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि बीजिंग सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए क्या कदम उठाती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार सरकार बड़े स्टिमुलस पैकेज के बजाय 'टारगेटेड और स्पेसिफिक' राहत उपायों पर ध्यान देगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये उपाय कंज्यूमर कॉन्फिडेंस और प्रॉपर्टी मार्केट को कितनी जल्दी पटरी पर ला पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.