China Economy: चीन की अर्थव्यवस्था ने चौंकाया, GDP ग्रोथ **4.5%** रही; क्या अब राहत पैकेज की उम्मीद खत्म?

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
China Economy: चीन की अर्थव्यवस्था ने चौंकाया, GDP ग्रोथ **4.5%** रही; क्या अब राहत पैकेज की उम्मीद खत्म?

चीन की GDP तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर **4.5%** रही है, लेकिन रियल एस्टेट में **20.6%** की भारी गिरावट चिंता का सबब बनी हुई है। सरकारी लक्ष्य के दायरे में रहने के कारण बड़े प्रोत्साहन (stimulus) की संभावना कम है, जिसका सीधा असर भारतीय मेटल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है।

चीन की अर्थव्यवस्था ने तीसरी तिमाही में बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 4.5% की ग्रोथ दर्ज की है। अर्थशास्त्रियों ने 4.4% की उम्मीद जताई थी, लेकिन पिछली तिमाही के 4.3% के मुकाबले यह प्रदर्शन बेहतर रहा। इस आंकड़े के साथ, नौ महीने की विकास दर 4.6% पहुंच गई है, जो सरकार के 4.5% से 5% के सालाना लक्ष्य के अनुरूप है। इस तेजी के पीछे मुख्य हाथ सरकारी फिजकल स्पेंडिंग का है, जिससे रिटेल सेल्स ने भी रफ्तार पकड़ी है।

रियल एस्टेट की सुस्ती बनी चुनौती

GDP के आंकड़े भले ही मजबूत दिख रहे हों, लेकिन अंदरूनी स्थिति चिंताजनक है। प्रॉपर्टी मार्केट में निवेश में 20.6% की गिरावट आई है, जो पिछले पीरियड के 19.9% के मुकाबले और गहरी है। चूंकि चीन में रियल एस्टेट घरेलू संपत्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड का बड़ा इंजन रहा है, इसलिए इस क्षेत्र की कमजोरी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा 'स्ट्रक्चरल रिस्क' बनी हुई है।

घरेलू खपत (domestic consumption) में कमी के चलते चीन अपनी ग्रोथ बनाए रखने के लिए पूरी तरह एक्सपोर्ट पर निर्भर हो गया है। इस वजह से उनका ट्रेड सरप्लस $1.2 ट्रिलियन के पार चला गया है, जिसके कारण यूरोपियन यूनियन जैसे बड़े ट्रेड पार्टनर्स के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है।

भारतीय निवेशकों पर असर

भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। ऐतिहासिक रूप से, चीन का स्टिमुलस पैकेज ग्लोबल कमोडिटी की डिमांड बढ़ाता रहा है। लेकिन इस बार चीन का ध्यान बड़े पैकेज के बजाय 'टारगेटेड इंटरवेंशन' पर है, जिसका मतलब है कि मेटल और एनर्जी डिमांड में भारी उछाल आने की संभावना कम है। इसका असर भारतीय मेटल और माइनिंग कंपनियों पर पड़ सकता है।

इसके अलावा, कमजोर घरेलू मांग के कारण चीन सस्ते सामानों को ग्लोबल मार्केट में डंप कर रहा है। इससे स्टील, केमिकल और टेक्सटाइल सेक्टर में भारतीय कंपनियों के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है। फिलहाल, बड़े स्टिमुलस न मिलने से कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव सीमित रह सकता है, जिससे भारतीय निवेशकों को अपनी कंपनियों के अर्निंग्स और घरेलू ग्रोथ ड्राइवरों पर ही फोकस रखना चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.