China Economic Growth: चीन की इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त, GDP गिरकर **4.3%** पर आई

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
China Economic Growth: चीन की इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त, GDP गिरकर **4.3%** पर आई

चीन की GDP ग्रोथ पहली तिमाही के **5%** से घटकर दूसरी तिमाही में **4.3%** पर आ गई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अब नए **15th Five-Year Plan** के तहत इनोवेशन-लेड ग्रोथ पर जोर देने की बात कही है, जो ग्लोबल कमोडिटी मार्केट के लिए बड़ा संकेत है।

चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत साफ दिखने लगे हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश के 77वें स्थापना दिवस के मौके पर माना कि आर्थिक चुनौतियों के बीच अब मॉडल बदलने की जरूरत है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की विकास दर पहली तिमाही के 5% से फिसलकर दूसरी तिमाही में 4.3% पर आ गई है।

क्यों बदल रहा है चीन का मॉडल?

चीन अब रियल एस्टेट और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित ग्रोथ मॉडल से हटकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन की ओर बढ़ना चाहता है। यह बदलाव उनके 15th Five-Year Plan (2026-2030) की नींव बनेगा। फिलहाल, चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू खपत का कम होना है, जो कुल GDP का सिर्फ 40% है। इसकी वजह से चीन का एक्सपोर्ट पर निर्भर रहना मजबूरी बन गया है, जो ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी में हो रहे बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील है।

भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?

चीन की इकोनॉमी का सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेस पर पड़ता है। अब तक चीन के बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स ही धातुओं और ऊर्जा की मांग के मुख्य इंजन थे। अगर वहां मांग घटती है, तो कमोडिटी के दाम गिर सकते हैं। इसका सीधा फायदा उन भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को होगा जो कच्चा माल आयात करते हैं, लेकिन यह भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर सकता है।

आने वाले समय में चीन सरकार की ओर से आने वाले स्टिमुलस पैकेजों और पॉलिसी बदलावों पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यही चीजें ग्लोबल इन्फ्लेशन और मार्जिन की दिशा तय करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.