चीन की सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बीजिंग ने Pledged Supplementary Lending (PSL) रेट को घटाकर **1.5%** कर दिया है और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए सब्सिडी का ऐलान किया है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि चीन का यह फैसला ग्लोबल कमोडिटी की डिमांड और भारतीय स्टील कंपनियों पर सीधा असर डाल सकता है।
बाजार को रफ्तार देने की तैयारी
People’s Bank of China ने देश की सुस्त पड़ती इकोनॉमी को संभालने के लिए मॉनेटरी और फिस्कल उपायों का पिटारा खोल दिया है। मुख्य कदम के तहत, PSL फैसिलिटी की ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई है, जिससे एक साल की दर गिरकर 1.5% पर आ गई है। इस फंड का इस्तेमाल सरकारी बैंकों के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाता है, ताकि बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाई जा सके।
रियल एस्टेट के लिए बड़ा बूस्टर
चीन के वित्त मंत्रालय ने रियल एस्टेट सेक्टर को संकट से बाहर निकालने के लिए एक नई योजना शुरू की है। अक्टूबर से, जो लोग पहली बार 120 वर्ग मीटर से कम और 1.5 मिलियन युआन तक की प्रॉपर्टी खरीदेंगे, उन्हें पांच साल तक मॉर्गेज प्रिंसिपल पर 1% की सालाना सब्सिडी मिलेगी। यह कदम खासकर उन छोटे शहरों में डिमांड बढ़ाने के लिए है जो 2021 से नकदी संकट से जूझ रहे हैं।
भारतीय मेटल कंपनियों पर नजर
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा मेटल कंज्यूमर है। चीन में हलचल का सीधा असर आयरन ओर (Iron Ore) और स्टील की कीमतों पर पड़ता है। Tata Steel, JSW Steel, Vedanta और Hindalco जैसी कंपनियां ग्लोबल मार्केट की कीमतों पर निर्भर करती हैं। अगर ये सब्सिडी चीन के प्रॉपर्टी मार्केट में जान फूंक देती है, तो इसका पॉजिटिव असर मेटल शेयरों पर दिख सकता है।
चुनौतियां अब भी बरकरार
हालांकि सरकार की यह कोशिश राहत देने वाली है, लेकिन चीन के सामने चुनौतियां अब भी बड़ी हैं। अप्रैल-जून तिमाही में ग्रोथ रेट 4.3% रही, जो तीन साल का निचला स्तर है, जबकि सरकार का सालाना लक्ष्य 4.5% से 5% के बीच है। चीन अब पारंपरिक स्टिमुलस के साथ-साथ टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी जोर दे रहा है, जिसके लिए रीलेंडिंग कोटा को 200 बिलियन युआन बढ़ाकर कुल 1.4 ट्रिलियन युआन कर दिया गया है। फिलहाल, निवेशकों को यह देखना होगा कि ये नीतियां जमीन पर कितना असर दिखा पाती हैं।
