केंद्र का बड़ा फैसला: राज्यों को ₹1.45 लाख करोड़ पेंशन फंड लौटाने से इनकार

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AuthorMehul Desai|Published at:
केंद्र का बड़ा फैसला: राज्यों को ₹1.45 लाख करोड़ पेंशन फंड लौटाने से इनकार

केंद्र सरकार ने पांच राज्यों की ₹1.45 लाख करोड़ NPS फंड को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में वापस ले जाने की मांग ठुकरा दी है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है और OPS की बहाली से दीर्घकालिक वित्तीय जोखिम जुड़ा है।

पेंशन फंड पर केंद्र का सख्त रुख

केंद्र सरकार ने पांच राज्यों द्वारा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत जमा ₹1.45 लाख करोड़ की राशि पुरानी पेंशन योजना (OPS) में वापस ट्रांसफर करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने यह राशि वापस मांगी थी।

वित्त राज्य मंत्री, पंकज चौधरी ने लोकसभा को बताया कि पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) एक्ट, 2013 के तहत ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जिसके जरिए यह पेंशन कॉर्पस (Pension Corpus) राज्य सरकारों को वापस किया जा सके। यह राशि राज्य सरकारों और उनके कर्मचारियों के योगदान के साथ-साथ उस पर अर्जित ब्याज से बनी है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर सरकार की चिंता

कानूनी अड़चनों के अलावा, केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) का विरोध जारी रखा है। सरकार का मानना है कि OPS एक अनफंडेड, डिफाइंड-बेनिफिट (Defined-Benefit) योजना है, जो सरकारी खजाने पर भारी और असहनीय बोझ डालती है। इस मांग को ठुकराकर, केंद्र ने NPS के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो कि एक डिफाइंड-कंट्रीब्यूशन (Defined-Contribution) मॉडल है जहाँ देनदारी केवल किए गए योगदान तक सीमित है।

यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए पेंशन नीति पर स्पष्टता लाता है। NPS कॉर्पस को विभिन्न वित्तीय साधनों में निवेश किया जाता है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और पूंजी बाजार में लिक्विडिटी (Liquidity) का समर्थन करता है। ऐसी बड़ी राशि की संभावित निकासी के लिए संपत्तियों की महत्वपूर्ण लिक्विडेशन (Liquidation) की आवश्यकता होती, जिससे फंड की स्थिरता और व्यापक वित्तीय प्रणाली में व्यवधान आ सकता था।

राज्यों द्वारा मांगी गई राशि का विवरण

इस पेंशन फंड वापसी की मांग का वित्तीय प्रभाव काफी बड़ा था, जिसमें राजस्थान सबसे अधिक राशि की मांग कर रहा था। राज्यों द्वारा मांगी गई पेंशन कॉर्पस का विवरण इस प्रकार है: राजस्थान (₹53,403.89 करोड़), पंजाब (₹40,673.08 करोड़), छत्तीसगढ़ (₹24,030.04 करोड़), झारखंड (₹14,420.90 करोड़), और हिमाचल प्रदेश (₹12,525.96 करोड़)।

सरकार का रुख स्पष्ट है कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली पर विचार नहीं किया जा रहा है, भले ही अलग-अलग राज्य पुरानी प्रणाली में वापस जाने का निर्णय लें। यह फैसला NPS आर्किटेक्चर की अखंडता की रक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि राज्य और केंद्र सरकारों की दीर्घकालिक वित्तीय देनदारियां प्रबंधनीय दायरे में रहें। अब निवेशक यह देखेंगे कि प्रभावित राज्य इन संचित पेंशन संपत्तियों के बिना अपनी वित्तीय योजना का प्रबंधन कैसे करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.