केंद्र सरकार ने NCR में स्थित करीब 600 औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण तकनीक अपग्रेड करने के लिए **₹1,150 करोड़** की कैपिटल सब्सिडी योजना पर विचार शुरू कर दिया है। यह कदम सर्दियों के दौरान होने वाले संभावित शटडाउन के जोखिम को कम करने में मददगार साबित होगा।
राहत की खबर: क्या है सरकारी योजना?
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने NCR के औद्योगिक हब जैसे गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और सोनीपत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए ₹1,150 करोड़ की आर्थिक मदद का खाका तैयार किया है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य कारखानों में आधुनिक एयर फिल्ट्रेशन और वेस्ट ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी लगवाना है।
क्यों है यह जरूरी?
NCR में टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टरों की कंपनियों को हर साल सर्दियों में 'ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के तहत सख्त पाबंदियों और अनिवार्य शटडाउन का सामना करना पड़ता है। सरकार का मानना है कि यदि कारखाने अपनी मशीनों में स्टैक एमिशन कंट्रोल और बेहतर एफ्लुएंट सिस्टम लगवा लेते हैं, तो पर्यावरण मानकों का पालन करना आसान होगा और बिजनेस ऑपरेशंस में कम बाधा आएगी।
प्रदूषण और फैक्ट्रियों का कनेक्शन
एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (Commission for Air Quality Management) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सर्दियों के दौरान PM2.5 कंसंट्रेशन में 25% से ज्यादा हिस्सेदारी इंडस्ट्रियल गैस उत्सर्जन से निकलने वाले सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर की होती है। अब तक सरकार का ध्यान ट्रैफिक और पराली पर ज्यादा था, लेकिन यह पहली बार है जब औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने के लिए सीधे तौर पर वित्तीय मदद दी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि यह प्रस्ताव कब तक औपचारिक मंजूरी पाता है और इसके लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) क्या होंगे। सबसे बड़ा मॉनिटरेबल पॉइंट यह होगा कि कंपनियां कितनी जल्दी इन तकनीकों को अपनाकर अपने उत्पादन को बिना रुके जारी रख पाती हैं।
