सरकार Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024 के तहत नए नियम बना रही है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में एयरफेयर (हवाई किराए) पर अस्थायी रोक लगाई जा सकेगी। त्योहारी सीजन में किराए में भारी उछाल के बाद सरकार यह कदम उठाने की तैयारी में है, जो एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है।
नियम और पारदर्शिता
सरकार अब एक नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर काम कर रही है। हालांकि सामान्य दिनों में किराया मार्केट के हिसाब से ही तय होगा, लेकिन प्राकृतिक आपदा या किसी बड़ी बाधा जैसी 'असाधारण स्थितियों' में सरकार अस्थायी तौर पर किराए की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी। इसके तहत एयरलाइंस को अपने 'फेयर बकेट्स' (fare buckets) की जानकारी कम से कम 1 महीने पहले DGCA को देनी होगी और इसे अपनी वेबसाइट पर भी डिस्प्ले करना होगा। त्योहारी सीजन में कुछ रूट्स पर किराए में 68% तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जिस पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
मुनाफे पर क्या होगा असर?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर है। एविएशन सेक्टर में मार्जिन पहले से ही बेहद कम होता है। एयरलाइंस के कुल खर्च का करीब 40% हिस्सा तो सिर्फ एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में ही चला जाता है। ऐसे में डायनेमिक प्राइसिंग के जरिए कंपनियां अपने लीज पेमेंट, मेंटेनेंस और क्रू की लागत निकालती हैं।
अगर सरकार की 'असाधारण आपातकाल' की परिभाषा बहुत व्यापक रही, तो इससे कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, रेगुलेटर्स इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि सेक्टर को बहुत ज्यादा रेगुलेट न किया जाए, क्योंकि पहले से ही कंपनियां विमानों के ग्राउंडिंग जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार 'असाधारण घटना' को कैसे परिभाषित करती है और इसका असर IndiGo, Air India, Akasa Air और SpiceJet जैसे बड़े प्लेयर्स पर क्या पड़ता है।
