सरकार ने PDS सप्लाई में टूटे चावल (Broken Rice) की मात्रा को सीमित करने का बड़ा फैसला लिया है। अब अक्टूबर 2026 से राशन में सिर्फ **10%** तक ही टूटे चावल की अनुमति होगी, ताकि **80 करोड़** से ज्यादा लाभार्थियों को बेहतर क्वालिटी का अनाज मिल सके।
बड़े बदलाव की तैयारी
केंद्र सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) में दशकों बाद एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई गाइडलाइंस के तहत रॉ राइस में टूटे हुए चावल की सीमा को 25% से घटाकर 10% कर दिया गया है। वहीं, पारबॉइल्ड राइस के लिए यह मानक 16% से सीधा 5% कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज की लागत में भारी कमी आएगी, जिससे सालाना लगभग ₹2,161 करोड़ की बचत हो सकती है।
इथेनॉल प्रोडक्शन पर नजर
इस फैसले के पीछे का एक बड़ा रणनीतिक उद्देश्य 'वेस्ट' को 'वेल्थ' में बदलना है। सरकार का लक्ष्य है कि क्वालिटी मानक कड़े होने से जो सरप्लस टूटा हुआ चावल निकलेगा, उसे इथेनॉल प्रोडक्शन में फीडस्टॉक के तौर पर इस्तेमाल किया जाए। यह कदम भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को मजबूती देगा।
राइस मिलर्स के सामने चुनौतियां
हालांकि यह सुधार फूड क्वालिटी के लिए अच्छा है, लेकिन राइस मिलिंग इंडस्ट्री के लिए मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। इन कड़े मानकों को लागू करने के लिए मिलर्स को नई और एडवांस्ड सॉर्टिंग मशीनरी में निवेश करना होगा। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इससे शुरुआती दौर में फाइनेंशियल स्ट्रेस आ सकता है। अब निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि मिलिंग यूनिट्स कितनी जल्दी इस बदलाव को अपनाती हैं और क्या इथेनॉल व एनिमल फीड मार्केट में टूटे चावल की मांग इस बढ़ी हुई सप्लाई को संभाल पाएगी।
