MMDR संशोधन 2026: अब राज्यों को खनन पर मनमाने टैक्स लगाने से रोका गया

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
MMDR संशोधन 2026: अब राज्यों को खनन पर मनमाने टैक्स लगाने से रोका गया

संसद ने माईन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 पास कर दिया है। यह कानून राज्यों को खनिजों पर अपने मन से टैक्स या सेस लगाने से रोकेगा, जिससे पूरे भारत में एक जैसी टैक्स दरें लागू होंगी और माइनिंग कंपनियों के लिए लागत का अनुमान लगाना आसान होगा। हालांकि, राज्यों के टैक्स अधिकारों पर इसके असर को लेकर कानूनी चुनौतियां आ सकती हैं।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: खनन क्षेत्र में टैक्स का नया ढांचा

केंद्र सरकार ने माईन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 को मंजूरी देकर खनन सेक्टर में टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नए कानून के तहत, अब राज्य सरकारें खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर खुद से सेस, टैक्स या कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा पाएंगी। टैक्स लगाने का अधिकार केंद्रीकृत होने से पूरे देश में माइनिंग ऑपरेशंस के लिए एक समान वित्तीय माहौल बनाने का लक्ष्य है।

राजस्व में बढ़ती खाई को पाटने की कोशिश

यह नीतिगत बदलाव पिछले एक दशक में बदले राजस्व समीकरणों के बाद आया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल खनिज और कोयला राजस्व में राज्यों का हिस्सा फाइनेंशियल ईयर 2014-15 में 65% था, जो 2024-25 तक बढ़कर 88% हो गया। यानी, राज्यों ने ₹71,035 करोड़ वसूले, जबकि केंद्र का हिस्सा घटकर सिर्फ 12% यानी ₹8,932 करोड़ रह गया। राजस्व संग्रह में इस बड़े अंतर के कारण केंद्र सरकार ने एक अनुमानित टैक्स व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया है।

माइनिंग कंपनियों को क्या होगा फायदा?

निवेशकों और माइनिंग कंपनियों के लिए सबसे बड़ा फायदा अनिश्चितता का कम होना है। पहले कंपनियों को यह जोखिम था कि राज्य सरकारें कभी भी नए टैक्स लगा सकती हैं या सेस की दरें बदल सकती हैं, जिससे उत्पादन लागत अचानक बढ़ सकती थी और मुनाफे पर असर पड़ सकता था। समान खनिज दरें लागू करके, सरकार अप्रत्याशित टैक्स मांगों के जोखिम को खत्म करना चाहती है। नया कानून पुरानी समस्याओं पर भी स्पष्टता लाता है, क्योंकि यह कानून लागू होने से पहले के बकाया या वसूल न किए गए शुल्कों को अमान्य कर देता है, हालांकि पहले से भुगतान किए गए टैक्स का रिफंड नहीं मिलेगा।

कानूनी चुनौतियां और संभावित जोखिम

हालांकि, इस कदम में कुछ जोखिम भी हैं। यह कानून 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को प्रभावी रूप से ओवरराइड करता है, जिसमें राज्यों को ऐसे टैक्स लगाने का अधिकार मिला था। इससे संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि खनिज-समृद्ध राज्य केंद्र सरकार के अपने राजस्व-अर्जन की शक्तियों को सीमित करने के अधिकार को चुनौती दे सकते हैं। यदि कानूनी विवाद उत्पन्न होते हैं, तो नए टैक्स ढांचे के कार्यान्वयन को लेकर अस्थायी अनिश्चितता पैदा हो सकती है।

निवेशकों को यह देखना होगा कि अलग-अलग राज्य इन प्रतिबंधों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या कोई अदालती चुनौती सामने आती है, जिससे नए टैक्स नियमों के स्थिरीकरण में देरी हो सकती है। इस क्षेत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र, राष्ट्रीय स्तर पर समान खनिज मूल्य निर्धारण के अपने लक्ष्य को खनिज-उत्पादक राज्यों की वित्तीय जरूरतों के साथ कितनी प्रभावी ढंग से संतुलित करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.