कर्मचारी यूनियनों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से बोनस कैलकुलेशन की वैधानिक सीमा को बढ़ाकर **₹21,000** करने की औपचारिक मांग की है। 'Code on Wages 2019' का हवाला देते हुए की गई यह मांग सरकारी खजाने और PSU के खर्चों पर सीधा असर डाल सकती है।
केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों, जिनका प्रतिनिधित्व NC-JCM (National Council of the Joint Consultative Machinery) कर रही है, ने कैबिनेट सेक्रेटरी को एक ज्ञापन सौंपा है। यह मांग श्रम और रोजगार मंत्रालय की 25 अगस्त, 2026 की उस नोटिफिकेशन के बाद आई है, जिसमें 'Code on Wages 2019' के तहत बोनस पात्रता और कैलकुलेशन फ्रेमवर्क को 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी माना गया है।
दशहरा से पहले राहत की उम्मीद
यूनियनों का जोर इस बात पर है कि नई बोनस सीमा को आगामी दशहरा सीजन से पहले लागू किया जाए। इस दौरान अक्सर परफॉरमेंस-लिंक्ड बोनस और एड-हॉक भुगतान किए जाते हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि मौजूदा वेतन ढांचा महंगाई और हालिया न्यूनतम वेतन वृद्धि के हिसाब से काफी पीछे छूट चुका है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
बाजार के नजरिए से यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर पब्लिक सेक्टर की कंपनियों (PSUs) के खर्चों पर पड़ेगा। यदि बोनस सीमा बढ़ती है, तो कंपनियों का कुल वेतन बिल (Wage Bill) बढ़ जाएगा, जिसका असर उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ सकता है।
एडमिनिस्ट्रेटिव चुनौतियां
नोटिफिकेशन के रेट्रोस्पेक्टिव (पिछली तारीख से) लागू होने के कारण सरकारी विभागों के लिए पेरोल का मिलान करना एक जटिल काम बन गया है। एचआर विभागों को नवंबर 2025 से लेकर अब तक के बोनस रिकॉर्ड्स को नए नियमों के साथ फिर से जांचना होगा। फिलहाल कैबिनेट सेक्रेटेरिएट इस मांग की समीक्षा कर रहा है और निवेशकों की नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
