केंद्र सरकार ने NSAP का नाम बदलकर 'Pradhan Mantri Samajik Sahayata Yojana' कर दिया है। इसके लिए **₹53,428 करोड़** का बड़ा बजट मंजूर हुआ है, जिसमें दिव्यांग पेंशन के नियमों को आसान बनाते हुए पात्रता दायरा बढ़ाया गया है।
केंद्रीय कैबिनेट ने नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) को 2026-2031 तक जारी रखने के लिए अपनी मुहर लगा दी है। अब इसे 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' के नाम से जाना जाएगा। सरकार ने इस स्कीम के लिए ₹53,428 करोड़ का आवंटन किया है, जो देश के कमजोर वर्गों के लिए एक बड़ी राहत है।
दिव्यांग पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव
इस नई योजना की सबसे बड़ी खासियत दिव्यांग पेंशन के नियमों का सरलीकरण है। अब दिव्यांगता का बेंचमार्क 80% से घटाकर 40% कर दिया गया है। इसके अलावा, न्यूनतम आयु की सीमा को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, यानी अब जन्म से ही पेंशन का लाभ लिया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत, 0 से 79 वर्ष के लाभार्थियों को ₹375 और 80 वर्ष से अधिक आयु वालों को ₹625 की मासिक पेंशन मिलेगी। वर्तमान में इस योजना का लाभ करीब 3.20 करोड़ लोगों को मिल रहा है।
योजनाओं के बदले नाम
सरकार ने अंब्रेला प्रोग्राम के साथ-साथ कई अन्य योजनाओं के नाम भी बदल दिए हैं:
- इंदिरा गांधी नेशनल ओल्ड एज पेंशन स्कीम अब 'प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना' होगी।
- विधवा पेंशन स्कीम अब 'प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना' कहलाएगी।
- दिव्यांगजन पेंशन स्कीम को 'प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना' नाम दिया गया है।
- नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम अब 'प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना' होगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो सरकार का यह कदम ग्रामीण और सामाजिक मांग को मजबूत करने वाला है। ₹53,428 करोड़ का यह खर्च निचले पायदान पर मौजूद परिवारों की वित्तीय स्थिरता में मदद करेगा। अब निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की नजर इस बात पर है कि राज्यों में इसे कितनी तेजी से लागू किया जाता है, ताकि सही लाभार्थियों तक इसका लाभ समय पर पहुंच सके।
