CII के वाइस प्रेसिडेंट Shashwat Goenka ने भारतीय व्यवसायों को ग्लोबल अस्थिरता से निपटने के लिए 'एंटिफ्रैजाइल' (Antifragile) ऑपरेटिंग मॉडल अपनाने की सलाह दी है। मुंबई में आयोजित CII नेशनल लीडरशिप समिट में उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में टिके रहने के लिए चपलता (Agility) ही एकमात्र रास्ता है।
मुंबई में आयोजित CII नेशनल लीडरशिप समिट के दौरान Shashwat Goenka, जो कि CII के वाइस प्रेसिडेंट और RP-Sanjiv Goenka (RPSG) ग्रुप के वाइस चेयरमैन हैं, ने साफ किया कि अब सिर्फ 'रेसिलीयन्स' (Resilience) काफी नहीं है। कंपनियों को ऐसे मॉडल की जरूरत है जो बाजार के झटकों से और बेहतर होकर निकले। उन्होंने कहा कि पुराने ढर्रे के 5 साल के प्लानिंग साइकिल अब काम नहीं आएंगे।
भविष्य के लिए तीन बड़े स्तंभ
Goenka ने लीडर्स को तीन अहम सुझाव दिए: पहला, बाजार में आने वाली हलचल को समय से पहले पहचानना; दूसरा, लगातार खुद को बदलने की संस्कृति विकसित करना; और तीसरा, तेज फैसले लेने और दीर्घकालिक रणनीति के बीच संतुलन बनाना। आज कंपनियां एक दोहरे दबाव में हैं—एक तरफ नई टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी में निवेश का बोझ है, तो दूसरी तरफ एनर्जी की बढ़ती कीमतें और लॉजिस्टिक की चुनौतियां हैं।
RPSG Group की क्या है तैयारी?
हाल ही में RPSG ग्रुप की 9वीं सालाना जनरल मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इसमें उधार लेने की सीमा (Borrowing Limits) को बढ़ाना शामिल है, जो कंपनी के बड़े विस्तार का संकेत है। हालांकि, निवेशकों के लिए चुनौती यही रहेगी कि कंपनी कैसे अपनी पावर, रिटेल और मीडिया जैसे विविध सेक्टरों में लाभप्रदता बनाए रखती है। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी अपना रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) कैसे मेंटेन करती है और कर्ज का बोझ बढ़ाए बिना विकास की गति को कैसे बरकरार रखती है।
