RoDTEP Scheme: एक्सपोर्टर्स की मांग, 3 महीने नहीं बल्कि 5 साल के लिए बढ़े सरकारी सपोर्ट

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
RoDTEP Scheme: एक्सपोर्टर्स की मांग, 3 महीने नहीं बल्कि 5 साल के लिए बढ़े सरकारी सपोर्ट

सरकार ने RoDTEP स्कीम को 31 दिसंबर, 2026 तक के लिए 3 महीने का विस्तार दिया है। राहत तो मिली है, लेकिन भारतीय उद्योग जगत की दिग्गज संस्था CII ने मांग की है कि इसे 5 साल के लिए बढ़ाया जाए ताकि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में अनिश्चितता न रहे।

सरकार का फैसला और इंडस्ट्री की चुनौती

Ministry of Commerce and Industry ने RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) स्कीम को फिलहाल 3 महीने का विस्तार दिया है। इस योजना के तहत एक्सपोर्टर्स को उन टैक्स और ड्यूटीज पर रिफंड मिलता है जो एक्सपोर्ट किए गए सामान पर चुकाए जाते हैं। यह रिफंड आमतौर पर एक्सपोर्ट वैल्यू के 0.3% से लेकर 3.9% के बीच होता है। हालांकि, CII का मानना है कि इतनी छोटी अवधि का विस्तार बड़ी कंपनियों के लिए नाकाफी है।

क्यों जरूरी है 5 साल का कमिटमेंट?

एक्सपोर्टर्स अक्सर विदेशी खरीदारों के साथ 1 साल या उससे लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट साइन करते हैं। ऐसे में अगर सरकारी नीति केवल कुछ महीनों के लिए बढ़ती है, तो कंपनियों के लिए लागत (Cost) कैलकुलेट करना और फिक्स्ड प्राइस तय करना मुश्किल हो जाता है।

बिना लॉन्ग-टर्म गारंटी के, अगर बीच कॉन्ट्रैक्ट में स्कीम बदली या रिफंड कम हुआ, तो एक्सपोर्टर्स को सीधा नुकसान झेलना पड़ सकता है। CII का तर्क है कि 5 साल की स्पष्टता मिलने से कंपनियां बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर सकेंगी और ग्लोबल पार्टनर्स के साथ भरोसेमंद रिश्ते बना पाएंगी।

ट्रेड का मौजूदा हाल

देश का एक्सपोर्ट सेक्टर फिलहाल तेजी दिखा रहा है। चालू फाइनेंशियल ईयर के अप्रैल से अगस्त के बीच एक्सपोर्ट 17.85% बढ़कर USD 215.91 बिलियन पर पहुंच गया है, हालांकि इसी दौरान इंपोर्ट भी 18.21% बढ़कर USD 363 बिलियन हो गया है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और केमिकल जैसे सेक्टर, जो इस इंसेंटिव पर काफी निर्भर हैं, उनके लिए अब सरकार का अगला फैसला ही मुनाफे का आधार तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.