FY27 की दूसरी तिमाही में भारत का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स पिछली तिमाही के **60.8** से उछलकर **66.0** के स्तर पर पहुंच गया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के दमदार प्रदर्शन के चलते कंपनियां अब अपना कैपेसिटी विस्तार और नई हायरिंग करने की तैयारी कर रही हैं।
भारत के कॉरपोरेट जगत का कॉन्फिडेंस एक नई ऊंचाई पर है। CII (Confederation of Indian Industry) के ताजा सर्वे के मुताबिक, बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (BCI) 66.0 पर पहुंच गया है, जो औद्योगिक आशावाद (Industrial Optimism) का एक नया रिकॉर्ड है। इस सर्वे में 240 से ज्यादा कंपनियों को शामिल किया गया, जो भारतीय इकोनॉमी के मौजूदा ग्रोथ साइकिल पर भरोसा जता रही हैं।
आंकड़ों में दिखी मजबूती
इस ग्रोथ को हालिया मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा का भी साथ मिला है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की GDP 7.8% बढ़ी है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2% और सर्विस सेक्टर में 10% की जोरदार बढ़त देखी गई। CII सर्वे में करंट कंडीशंस के लिए इंडेक्स 62.6 और भविष्य की उम्मीदों के लिए 67.7 पर दर्ज किया गया है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
कॉरपोरेट की बदली हुई रणनीति में दो बड़ी बातें सामने आई हैं:
- कैपेसिटी यूटिलाइजेशन: करीब 51% कंपनियां 2026 की दूसरी छमाही में अपनी क्षमता के 80% से ज्यादा पर काम करने की योजना बना रही हैं। यह बेहतर प्रॉफिट मार्जिन की ओर इशारा करता है।
- हायरिंग में तेजी: सर्वे में शामिल 53% कंपनियां इस तिमाही में नए लोगों को भर्ती करने की तैयारी में हैं, जो बाजार में मजबूत डिमांड को दर्शाता है।
चुनौतियों का भी रखना होगा ध्यान
सब कुछ ठीक होने के बावजूद, मैनेजमेंट टीमें अभी भी कुछ रिस्क को बारीकी से देख रही हैं। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में उठा-पटक और वेस्ट एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि यह बढ़ता हुआ कॉन्फिडेंस कंपनियों के फाइनेंशियल नतीजों में कितनी जल्दी बदलता है और क्या ये कंपनियां बिना कर्ज का बोझ बढ़ाए अपनी विस्तार योजनाएं पूरी कर पाती हैं।
