चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही के लिए आर्थिक चुनौतियों का संकेत दिया है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल मोनेटरी टाइटनिंग चिंता का बड़ा कारण बनी हैं।
भारत ने फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन सरकार ने आने वाले समय के लिए सतर्कता बरतने का इशारा किया है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि ग्लोबल हालात अब भारतीय कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं।
क्रूड ऑयल का संकट
CEA की सबसे बड़ी चिंता ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट में उछाल है। सितंबर में इंडियन बास्केट के लिए क्रूड ऑयल की कीमत $117 प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो जून से अगस्त के बीच $80-85 के दायरे में थी। निवेशकों के लिए यह दोहरे जोखिम की तरह है। पहला, ईंधन की महंगी कीमतों से इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे ट्रांसपोर्ट, केमिकल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के मार्जिन पर दबाव बनेगा। दूसरा, यदि कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो यह महंगाई के आंकड़ों को बिगाड़ सकती हैं। फिलहाल भारत की महंगाई दर 4.3% है, जो RBI के दायरे में है, लेकिन तेल की कीमतें बढ़ने पर RBI को लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं।
सरकार का पक्ष और डेटा
इन जोखिमों के बावजूद सरकार आर्थिक आंकड़ों को लेकर सकारात्मक है। नागेश्वरन ने बताया कि 7.8% की ग्रोथ हेल्दी क्रेडिट ग्रोथ और स्थिर GST कलेक्शन जैसे ठोस आंकड़ों पर टिकी है। इसका मतलब है कि ग्लोबल लिक्विडिटी में सख्ती के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था में मोमेंटम बरकरार है।
रेटिंग एजेंसियों और बाजार पर असर
जहां S&P Global, Fitch और Moody’s जैसी एजेंसियों ने भारत के ग्रोथ फोरकास्ट को अपग्रेड किया है, वहीं सरकार ग्लोबल अस्थिरता के असर को लेकर फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। निवेशकों को अब RBI की महंगाई पर कमेंट्री और तेल की कीमतों पर नजर रखनी होगी। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के अर्निंग्स में यह साफ हो जाएगा कि वे इन बढ़ते इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज कर रही हैं।
