मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने सभी राज्यों से अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को बढ़ाकर 2031-32 तक GSDP के **3%** तक ले जाने का आग्रह किया है।
लक्ष्य और विकास की नई राह
भारत के 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने राज्यों को सड़कों, पावर प्लांट और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने की सलाह दी है। वर्तमान में राज्यों का औसत कैपिटल एक्सपेंडिचर GSDP का लगभग 2.4% है, जिसे बढ़ाकर 3% तक ले जाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह विचार पूर्व महाराष्ट्र एडिशनल चीफ सेक्रेटरी Sudhir Shrivastava की ओर से आया है।
प्राइवेट इन्वेस्टमेंट का 'Crowding-in' इफेक्ट
निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। जब राज्य सरकारें बेहतर रोड और पावर ग्रिड तैयार करती हैं, तो कंपनियों के लिए व्यापार करना सस्ता हो जाता है। इसे 'क्राउडिंग-इन' (Crowding-in) कहा जाता है, जहाँ सरकारी खर्च प्राइवेट कंपनियों को निवेश के लिए प्रेरित करता है। CEA ने जोर दिया कि अगर राज्य जमीन और यूटिलिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया को आसान बना दें, तो प्राइवेट निवेश में भारी उछाल आ सकता है।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, 3% का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। कई राज्य पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबे हैं और उनके पास बजट का दायरा सीमित है। इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण में देरी और रेगुलेटरी मंजूरियों के कारण प्रोजेक्ट्स अटकना आम बात है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इन घोषणाओं का असर तभी दिखाई देगा जब प्रोजेक्ट्स असल में जमीन पर उतरेंगे और निर्माण कार्य शुरू होगा।
किन सेक्टरों पर रखें नजर?
इस पहल से कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, इंजीनियरिंग और पावर इक्विपमेंट सेक्टर में लंबी अवधि की डिमांड बढ़ सकती है। इसके अलावा, एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़ी टेक्नोलॉजी जैसे बैटरी स्टोरेज और पंप-स्टोरेज पर भी निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए। आने वाले महीनों में जिन राज्यों के बजट और प्रोजेक्ट पाइपलाइन में तेजी दिखेगी, उन सेक्टरों में बड़ा एक्शन देखने को मिल सकता है।
