मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने अमेरिकी ट्रेड संबंधों में अनिश्चितता, एनर्जी की बदलती कीमतें और AI सेक्टर में भारत की कमी को लेकर चेतावनी दी है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि भारत के लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स अभी भी बेहद मजबूत हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सतर्क रुख अपनाया है। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने उन बाहरी चुनौतियों का जिक्र किया जो शॉर्ट-टर्म में ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं।
ट्रेड और एनर्जी का प्रेशर
Nageswaran ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड संबंधों को 'अनइजी इक्विलिब्रियम' (uneasy equilibrium) करार दिया है। टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद और रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी कानूनों का डर, आने वाले महीनों में फॉरेन इन्वेस्टमेंट सेंटीमेंट पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स लागत और नेचुरल गैस जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा को चुनौती दे रहा है।
AI इन्वेस्टमेंट पर बड़ा बयान
एक हैरान करने वाली बात यह है कि भारत के शेयर मार्केट में अभी तक कोई बड़ा 'AI प्ले' देखने को नहीं मिला है। Nageswaran का मानना है कि यह कमी आगे चलकर वरदान साबित हो सकती है। उनके अनुसार, दुनिया भर में AI पर हो रहा भारी खर्च बहुत ज्यादा कर्ज और स्पेकुलेशन पर टिका है, जिसमें भविष्य में करेक्शन आ सकता है। ऐसे में ग्लोबल इन्वेस्टर्स का ध्यान स्थिर ग्रोथ वाले देशों की ओर शिफ्ट होगा, जहां भारत एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरेगा।
मजबूत फंडामेंटल्स की उम्मीद
बावजूद इन शॉर्ट-टर्म चुनौतियों के, भारत का कर्ज-जीडीपी रेशियो (Debt-to-GDP ratio) विकसित देशों की तुलना में काफी स्टेबल बना हुआ है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि ग्लोबल ट्रेंड्स के बावजूद भारत की इकोनॉमी लॉन्ग-टर्म में लचीली और निरंतर विकास की ओर अग्रसर रहेगी।
