CBIC ने दवाओं और मेडिकल डिवाइसेज के इंपोर्ट के लिए **7-कैटेगरी** वाला डॉक्यूमेंट चेकलिस्ट पेश किया है। Circular No. 40/2026 के तहत, अब पोर्ट क्लीयरेंस और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।
अब क्लीयरेंस होगा पहले से आसान
Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) ने फार्मास्युटिकल्स, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइसेज के इंपोर्ट क्लीयरेंस में बड़ा बदलाव किया है। 3 सितंबर, 2026 को जारी Circular No. 40/2026 के जरिए सरकार ने अब 7-पॉइंट की एक स्टैंडर्ड चेकलिस्ट लागू कर दी है। इसका मुख्य मकसद कस्टम ऑफिसर्स की 'डिसक्रिशनरी' (मनमानी) चेकिंग को खत्म करना और Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) के मानकों के साथ तालमेल बिठाना है।
कंपनियों को कैसे मिलेगा फायदा?
फार्मा सेक्टर में रॉ-मटेरियल जैसे APIs और मेडिकल इक्विपमेंट के लिए कंपनियां पूरी तरह इंपोर्ट पर निर्भर हैं। अब तक पोर्ट्स पर अटकने वाली फाइलों की वजह से कंपनियों को भारी Demurrage Charges (पेनल्टी) देने पड़ते थे, जो उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर बुरा असर डालते थे। इस नए नियम से अब सप्लाई चेन की रफ्तार बढ़ेगी और ऑपरेशनल खर्च में कमी आने की उम्मीद है।
डिजिटल कंप्लायंस है जरूरी
अब कंपनियों को सारा डेटा e-SANCHIT पोर्टल पर अपलोड करना होगा। क्लीयरेंस की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल होने से 'Out-of-charge' स्टेटस जल्दी मिल सकेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
हालांकि यह बदलाव पॉजिटिव है, लेकिन शुरुआती दौर में दिक्कतों की संभावना बनी रहती है। अगर कंपनियों के डॉक्यूमेंट्स, जैसे कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या इंपोर्ट लाइसेंस, इस नई चेकलिस्ट से पूरी तरह मेल नहीं खाएंगे, तो कार्गो अटक सकता है। निवेशकों को आने वाली अर्निंग्स कॉल्स में यह देखना होगा कि क्या वाकई कंपनियों की लॉजिस्टिक कॉस्ट कम हो रही है या नहीं।
