GST Data Controversy: CBIC ने किया बचाव, बताया क्यों **14.8%** की ग्रोथ का आंकड़ा है सही

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
GST Data Controversy: CBIC ने किया बचाव, बताया क्यों **14.8%** की ग्रोथ का आंकड़ा है सही

GST कलेक्शन के आंकड़ों को लेकर छिड़ी बहस पर CBIC ने चुप्पी तोड़ी है। बोर्ड ने सफाई दी है कि अगस्त में दर्ज की गई **14.8%** की ग्रोथ पूरी तरह सटीक है और इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी नहीं की गई है।

आंकड़ों का विवाद और सरकार का तर्क

हाल ही में अगस्त के लिए GST कलेक्शन ₹1,99,853 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें 14.8% की सालाना बढ़ोतरी दिखाई गई। हालांकि, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इस पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि सरकार ने बेस कैलकुलेशन से 'GST कंपनसेशन सेस' को बाहर रखकर आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। गर्ग का मानना है कि यदि सेस को शामिल किया जाए, तो 5 महीनों की वास्तविक ग्रोथ केवल 4.08% ही रहती है।

CBIC ने क्यों नकारा तर्क?

CBIC ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे गणितीय रूप से गलत बताया है। बोर्ड का कहना है कि:

  • कंपनसेशन सेस को अधिकांश वस्तुओं से सितंबर 2025 में हटा दिया गया था।
  • तंबाकू उत्पादों से इसे फरवरी 2026 तक पूरी तरह खत्म कर दिया गया।

चूंकि यह लेवी (Levy) अब अस्तित्व में ही नहीं है, इसलिए इसे पुराने साल के आंकड़ों में जोड़ना भ्रामक होगा। CBIC के अनुसार, सटीक तुलना के लिए एक 'कॉन्स्टेंट टैक्स बेस' का होना अनिवार्य है।

पारदर्शिता पर सवाल और भविष्य की राह

यह विवाद भारत के आर्थिक आंकड़ों की पारदर्शिता और उनकी गणना की पद्धति पर उठ रहे व्यापक सवालों का हिस्सा है। CBIC ने स्पष्ट किया है कि वे नवंबर 2025 से ही अपनी मासिक रिपोर्ट में नॉन-सेस रेवेन्यू को अलग से दिखा रहे हैं, ताकि स्टेकहोल्डर्स को सही स्थिति पता चल सके। निवेशकों की नजरें अब अगले महीनों के GST अपडेट्स पर टिकी हैं, क्योंकि टैक्स रेवेन्यू की गणना का तरीका देश की आर्थिक रफ्तार को समझने के नजरिए को प्रभावित करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.