CBDT ने टैक्स रिकवरी के नियमों में बड़े बदलाव करते हुए गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधानों को हटा दिया है। यह नियम **1 अप्रैल, 2026** से प्रभावी माने जाएंगे। साथ ही, वैल्युअर्स और इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन बढ़ाकर **31 मार्च, 2027** कर दी गई है।
अब गिरफ्तारी नहीं, एसेट पर होगा फोकस
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इनकम-टैक्स (चौथा संशोधन) रूल्स, 2026 के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। अब टैक्स रिकवरी की प्रक्रिया में गिरफ्तारी या हिरासत का डर खत्म हो गया है। सरकार का यह कदम फाइनेंस एक्ट 2026 और इनकम-टैक्स एक्ट 2025 के अनुरूप है। हालांकि, टैक्स अथॉरिटी अपना रुख सख्त बनाए रखेगी, जहां वे संपत्ति की कुर्की, एसेट की बिक्री और अन्य कानूनी तरीकों से टैक्स वसूली जारी रखेंगे। टैक्स विवादों में अब व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बजाय वित्तीय संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन में रियायत
प्रोफेशनल कम्युनिटी के लिए बोर्ड ने राहत देते हुए वैल्युअर्स और अधिकृत इनकम-टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख को 30 सितंबर, 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2027 कर दिया है।
इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बोर्ड ने Form 169 और Form 171 को अपडेट किया है। नए आवेदकों को रजिस्ट्रेशन के लिए ₹10,000 की फीस देनी होगी, जबकि वेल्थ-टैक्स एक्ट 1957 के तहत पहले से रजिस्टर्ड प्रोफेशनल्स को इस शुल्क से छूट दी गई है। यह रजिस्ट्रेशन 11 अलग-अलग एसेट कैटेगरी के लिए उपलब्ध है, जिसमें सिक्योरिटीज, मशीनरी, ज्वेलरी और कलाकृतियां शामिल हैं।
डिजिटल कम्युनिकेशन में सरलता
प्रशासनिक स्तर पर, नियम 176 में संशोधन किया गया है। अब डिजिटल सिग्नेचर की अनिवार्यता को कम करते हुए इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के व्यापक प्रावधानों को जोड़ा गया है, जिससे नोटिस और अन्य दस्तावेजों के आदान-प्रदान में आसानी होगी। टैक्स विभाग पूरी तरह से इनकम-टैक्स एक्ट 2025 के फ्रेमवर्क में शिफ्ट हो रहा है, जिसके चलते यह बदलाव अहम माना जा रहा है।
