Swiggy CEO: बजट ने डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को बनाया 'ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर', Zomato भी करेगा तरक्की?

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Swiggy CEO: बजट ने डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को बनाया 'ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर', Zomato भी करेगा तरक्की?
Overview

हालिया यूनियन बजट में शहरी क्षेत्रों के विकास और आर्थिक गतिविधियों के औपचारिकीकरण पर ज़ोर देने के कारण, फ़ूड और क्विक कॉमर्स डिलीवरी जैसे प्लेटफॉर्म्स का महत्व बढ़ गया है। Swiggy के ग्रुप CEO, श्रीहर्ष मजेटी का मानना है कि इस बजट के बाद ये सेवाएं महज़ 'डिस्क्रिशनरी' (वैकल्पिक) न रहकर, 'ज़रूरी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर' का हिस्सा बन जाएंगी। यह अहम बदलाव टियर II और टियर III शहरों में आर्थिक विकास को गति देगा और इन प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता प्रमुख महानगरों से आगे बढ़ाएगा।

Swiggy के ग्रुप CEO, श्रीहर्ष मजेटी का यह नज़रिया महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि बजट के प्रावधान, खासकर सिटी इकोनॉमिक रीजन्स (CERs) के विकास और शहरीकरण को तेज़ी देने के प्रयास, डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को एक स्थायी और अनिवार्य भूमिका में स्थापित करेंगे। यह 'री-क्लासिफिकेशन' (पुनर्वर्गीकरण) भारत की बदलती आर्थिक संरचना में इन प्लेटफॉर्म्स के महत्व को रेखांकित करता है।

बजट कैसे बनेगा 'इंफ्रास्ट्रक्चर' का आधार?

मजेटी का मानना है कि बजट का उद्देश्य टियर-II और टियर-III शहरों में संगठित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे इन उभरते शहरी केंद्रों में सेवा-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए डिलीवरी और सुविधा प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म्स महत्वपूर्ण हो जाएंगे। इस औपचारिकीकरण से अनुमानित GDP में वृद्धि हो सकती है। हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) स्किलिंग और पर्यटन (Tourism) सर्किट में लक्षित निवेश से यात्रा की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा फ़ायदा उन सेवा क्षेत्रों को होगा जिनका समर्थन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स करते हैं। इसके अलावा, GST और income tax में संभावित समायोजन से मांग-पक्ष को प्रोत्साहन मिलने और विभिन्न आय वर्गों में कुल खपत (consumption) को मज़बूत करने की उम्मीद है, जिससे डिलीवरी सेवाओं के लिए ऑर्डर वॉल्यूम (order volume) बढ़ेगा।

प्रतिस्पर्धा और वित्तीय स्थिति

यह सब तब हो रहा है जब बाजार में Swiggy और इसके लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी Zomato के बीच ज़बरदस्त प्रतिस्पर्धा है। 2026 की शुरुआत तक, Zomato फूड डिलीवरी मार्केट शेयर में 55-58% ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) के साथ आगे है, जबकि Swiggy की हिस्सेदारी 42-45% है। क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) सेगमेंट, जो तेज़ी से बढ़ रहा है, उसमें Zomato का Blinkit 40-45% मार्केट शेयर के साथ मज़बूत स्थिति में है, जबकि Swiggy Instamart का हिस्सा 20-25% है।

वित्तीय मोर्चे पर, Zomato मुनाफे की ओर बढ़ रहा है, जिसने FY25 में ₹21,320 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹527 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। फरवरी 2026 तक, इसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹2.7 लाख करोड़ था। वहीं, Swiggy ने 2025 में ₹16,333 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, लेकिन इसी अवधि में उसे ₹3,107 करोड़ का बड़ा नेट लॉस (net loss) हुआ। हालिया फंडिंग राउंड के आधार पर Swiggy का वैल्यूएशन लगभग $10.7 बिलियन से $12.7 बिलियन के बीच है, जो इसके ग्रोथ ट्रैजेक्टरी को दर्शाता है, लेकिन क्विक कॉमर्स में आक्रामक विस्तार और निवेश की लागतों को भी उजागर करता है, जो Zomato के अधिक लाभदायक ऑपरेशंस के विपरीत है।

सेक्टर की ग्रोथ और भविष्य की संभावनाएं

भारत में क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) मार्केट में ज़बरदस्त विस्तार की उम्मीद है, जिसके 2029 तक लगभग $10 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है और 2026 से 2031 के बीच 12.74% के CAGR (Compound Annual Growth Rate) से बढ़ने की संभावना है। इसी तरह, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स (e-commerce logistics) सेक्टर के 2030 तक $69.5 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 25.9% के CAGR से बढ़ेगा। बजट का CERs विकसित करने और टियर II व टियर III शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर जोर, इन विकास अनुमानों के साथ सीधा तालमेल बिठाता है और टियर I बाजारों से आगे विस्तार को बढ़ावा देगा। ऐतिहासिक रूप से, बजटों ने जो खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा दिया है, उन्होंने कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी (consumer discretionary) और लॉजिस्टिक्स-संबंधित शेयरों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, जिससे कुशल वितरण (efficient distribution) सक्षम करने वाली कंपनियों को बढ़ावा मिला है।

आगे की राह: 'ज़रूरत' की परिभाषा बदलेगी

डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स का 'आवश्यक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर' के रूप में पुनर्वर्गीकरण एक अधिक मज़बूत इन्वेस्टमेंट नैरेटिव (investment narrative) प्रदान करता है। यह भविष्य की ओर इशारा करता है जहाँ उनकी आवश्यकता को पहचाना जाएगा, जिससे वे केवल वैकल्पिक सेवाओं के रूप में देखे जाने से बचेंगे जो आर्थिक उतार-चढ़ाव (economic fluctuations) के अधीन हैं। टियर II और टियर III शहरों में विस्तार पर रणनीतिक ज़ोर, सरकारी पहलों द्वारा समर्थित, विकास का एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रस्तुत करता है। हालांकि, Swiggy के लिए मुख्य चुनौती इस बढ़ी हुई पहुंच और ऑपरेशनल आवश्यकता को स्थायी लाभप्रदता (sustainable profitability) में बदलना है, एक ऐसा क्षेत्र जहाँ Zomato वर्तमान में लाभप्रदता के मामले में आगे है। इस रणनीति की सफलता आक्रामक निवेश और कुशल ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन (operational execution) के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी, ताकि भारत की शहरी अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में अपनी स्थिति को मज़बूत किया जा सके।

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